एग्रीवेट: Maharashtra Sugarcane FRP Dues: महाराष्ट्र में गन्ने की नई पेराई शुरू होने से पहले किसानों के बकाया भुगतान का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है. राज्य की 30 चीनी मिलों ने 2025-26 के पेराई सीजन का किसानों का पूरा एफआरपी भुगतान अब तक नहीं किया है. इन मिलों पर किसानों के 194 करोड़ रुपये बकाया हैं. चीनी आयुक्तालय (Sugar Commissionerate) की 15 सितंबर 2026 को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है. हालांकि, राज्य की ज्यादातर चीनी मिलें किसानों का भुगतान कर चुकी हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, पेराई सीजन में शामिल 210 मिलों में से 180 मिलों ने किसानों को एफआरपी की पूरी रकम दे दी है.
2025-26 के पेराई सीजन में महाराष्ट्र की 210 चीनी मिलों ने कुल 1,045.63 लाख टन गन्ने की पेराई की. इस दौरान किसानों को गन्ने की एफआरपी के तौर पर बड़ी रकम का भुगतान किया गया. रिपोर्ट के अनुसार, गन्ने की कुल एफआरपी देनदारी 40,446 करोड़ रुपये थी. इसमें गन्ने की कटाई और ढुलाई यानी एचएंडटी का खर्च भी शामिल था.
मिलों की ओर से कुल 41,730 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. लेकिन किसानों को मिलने वाली वास्तविक एफआरपी की बात करें तो कटाई और ढुलाई का खर्च अलग करने के बाद 40,252 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है. इसके बावजूद 194 करोड़ रुपये अभी भी किसानों को मिलने बाकी हैं.
महाराष्ट्र में किसानों को मिलने वाली वास्तविक एफआरपी का 99.52 फीसदी भुगतान किया जा चुका है. यानी राज्य की ज्यादातर मिलों ने किसानों का पैसा चुका दिया है, लेकिन कुछ मिलों पर अभी भी बकाया बना हुआ है. कुल 210 मिलों में से 180 मिलों ने 100 फीसदी एफआरपी भुगतान कर दिया है. इन मिलों से जुड़े गन्ना किसानों का पूरा भुगतान हो चुका है. वहीं, 26 चीनी मिलों ने 80 फीसदी से लेकर 99.99 फीसदी तक एफआरपी का भुगतान किया है. इन मिलों से जुड़े किसानों को अभी बाकी रकम का इंतजार है.
रिपोर्ट में कुछ ऐसी मिलों की स्थिति भी सामने आई है, जहां किसानों का भुगतान बाकी मिलों की तुलना में काफी कम हुआ है. दो चीनी मिलों ने 60 से 80 फीसदी तक एफआरपी का भुगतान किया है. वहीं, दो मिलों ने 59 फीसदी से भी कम एफआरपी चुकाई है. इन मिलों से जुड़े किसानों के लिए बकाया भुगतान अभी बड़ी चिंता बना हुआ है.
महाराष्ट्र में 2026-27 के नए गन्ना पेराई सीजन की तैयारी शुरू हो चुकी है. चीनी मिलें नए सीजन में पेराई शुरू करने की तैयारी में जुटी हैं. ऐसे समय में पिछले सीजन का बकाया भुगतान किसानों के लिए अहम मुद्दा बना हुआ है. गन्ना किसानों की कमाई काफी हद तक समय पर मिलने वाले भुगतान पर निर्भर करती है. ऐसे में जिन किसानों का पैसा अभी चीनी मिलों में फंसा हुआ है, उनकी नजर बाकी एफआरपी मिलने पर है. नए पेराई सीजन की शुरुआत के बीच अब यह देखना अहम होगा कि बकाया 194 करोड़ रुपये का भुगतान कब तक पूरा होता है.