एग्रीवेट: यूरोपीय संघ (EU) को इस साल चीन से भेजे गए कम से कम 5 चावल के स्नैक या आटे के शिपमेंट में जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म (GMO) मिला है. इसकी जानकारी यूरोपीय संघ (EU) के रैपिड अलर्ट सिस्टम फॉर फूड एंड फीड (RASFF) की रिपोर्ट में सामने आई है. ऐसे यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब चीन मार्च से भारत से भेजे गए कुछ चावल के शिपमेंट को GMO की कथित मौजूदगी के कारण खारिज कर रहा है. चीन ने कजाकिस्तान, रूस, यूक्रेन, बेलारूस और जापान से आए कुछ शिपमेंट को भी वापस किया है. इन देशों में GMO फसलों की खेती पर रोक है. इन देशों से भेजे गए रेपसीड तेल और गेहूं के आटे की खेप पर भी सवाल उठाए गए थे.
आंकड़ों के मुताबिक, चीन ने जनवरी से जून के बीच 146 शिपमेंट को खारिज किया, जो 2025 में खारिज किए गए 38 शिपमेंट के मुकाबले करीब चार गुना है. यूरोपीय संघ के रैपिड अलर्ट सिस्टम फॉर फूड एंड फीड (RASFF) के मुताबिक, चीन से भेजे गए कई खाद्य उत्पादों में जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म (GMO) की मौजूदगी पाई गई है. इनमें राइस स्टिक्स, राइस क्रैकर्स, नूडल्स और हाइड्रोलाइज्ड राइस फ्लोर शामिल हैं. इसके अलावा जापान की पारंपरिक मिसो पेस्ट में भी GMO मिला.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे हालिया मामले में इटली के अधिकारियों ने चीन से आए राइस स्टिक्स में अनधिकृत ‘35 S टर्मिनेटर’ की मौजूदगी पाई. यह एक खास DNA सीक्वेंस है, जिसका इस्तेमाल जेनेटिकली मॉडिफाइड पौधों में किया जाता है. यह पौधों की कोशिकाओं में डाले गए जीन की गतिविधि को नियंत्रित करने में मदद करता है. 3 अगस्त को इटली ने चीन से आए राइस क्रैकर्स में GMO की पुष्टि की थी. वहीं, 6 जुलाई को नीदरलैंड ने चीन से भेजे गए हाइड्रोलाइज्ड राइस फ्लोर के शिपमेंट में GMO पाया था.
नीदरलैंड के अधिकारियों ने 12 जुलाई को चीन से आए मिसो पेस्ट में Cry1AB/AC GMO की मौजूदगी पाई. इससे पहले 12 मार्च को चीन से आए राइस नूडल्स में भी इसी GMO की पुष्टि हुई थी. आंकड़ों के मुताबिक, 2002 से 2025 के बीच EU ने चीन के खाद्य निर्यात को लेकर GMO से जुड़े 275 से ज्यादा नोटिफिकेशन जारी किए हैं. इनमें अकेले चावल से बने उत्पादों के खिलाफ 2006 से 2025 के बीच 125 से ज्यादा अलर्ट शामिल हैं.
इसके मुकाबले भारत के खाद्य निर्यात में GMO की मौजूदगी को लेकर EU की ओर से सिर्फ एक नोटिफिकेशन जारी हुआ है. यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है, जब चीन ने इस साल भारत से भेजे गए चावल की कुछ खेपों में GMO होने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, Cry1AB/AC एक तरह का संयुक्त Bt जीन है. इसका इस्तेमाल सबसे पहले कपास में किया गया था. अब इसका इस्तेमाल चावल और जूट जैसी दूसरी फसलों में भी किया जाता है. Cry1Ab/Ac जीन का इस्तेमाल जेनेटिकली मॉडिफाइड चावल की कुछ किस्मों में किया गया है. चीन में 2009 से 2011 के बीच Bt या GM चावल को व्यावसायिक स्तर पर लाने की दिशा में भी काम हुआ था.
चीन में जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) चावल की व्यावसायिक खेती को अभी तक बड़े स्तर पर मंजूरी नहीं मिली है. हालांकि, देश में GM चावल के परीक्षण और उससे जुड़े विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं. अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के पूर्व अर्थशास्त्री फ्रेड गेल ने अपने ब्लॉग Dim Sums में कहा कि चीन GM चावल की खेती से इनकार करता है, लेकिन पहले ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जब वैज्ञानिक परीक्षणों में उगाया गया GM चावल बाजार तक पहुंच गया.