पराली जलाने वाले किसानों पर सख्ती की तैयारी, भूमि रिकॉर्ड में 15 महीने की ‘रेड एंट्री’ का प्रस्ताव – एग्रीवेट

atulpradhan
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एग्रीवेट: Stubble Burning: पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार नियमों को और सख्त करने की तैयारी में है. पर्यावरण मंत्रालय ने नए मसौदा नियम जारी किए हैं, जिनमें पराली जलाने वाले खेत को 15 महीने तक ‘रेड कैटेगरी’ में रखने और जमीन के रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ दर्ज करने का प्रस्ताव है. अगर उसी जमीन पर दोबारा पराली जलाने की घटना सामने आती है या लगाया गया पर्यावरणीय जुर्माना समय पर जमा नहीं होता है, तो यह अगले 15 महीने तक बढ़ सकती है. हालांकि, यह अभी मसौदा है और अंतिम नियम लागू होने से पहले सरकार ने संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं. मसौदे में ‘रेड एंट्री’ के सभी संभावित असर भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं किए गए हैं.

किन राज्यों में लागू होगा प्रस्ताव?

प्रस्तावित व्यवस्था दिल्ली-एनसीआर और आसपास के उन इलाकों में लागू होगी जहां पराली जलाने की घटनाओं का असर दिल्ली की हवा पर पड़ता है. इसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के एनसीआर क्षेत्र शामिल हैं. नए नियम 2023 में लागू CAQM व्यवस्था और 2024 में किए गए बदलावों की जगह लेने के लिए प्रस्तावित किए गए हैं. इसका मकसद खेतों में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को कम करना और सर्दियों के दौरान दिल्ली-एनसीआर में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण पर लगाम लगाना है.

पराली जलाने पर कितना जुर्माना लगेगा?

नए मसौदे में पराली जलाने पर जुर्माने की मौजूदा दरों में बदलाव का प्रस्ताव नहीं है. यानी 2024 में तय की गई दरें ही जारी रहेंगी.

2 एकड़ से कम जमीन पर 5,000 रुपये

2 से 5 एकड़ जमीन पर 10,000 रुपये

अगर किसान पर लगाया गया पर्यावरणीय जुर्माना 30 दिन के भीतर जमा नहीं करता है, तो इसकी वसूली भूमि राजस्व के बकाये के तौर पर की जा सकती है.

‘रेड एंट्री’ का क्या असर होगा?

मसौदे में फिलहाल यह साफ नहीं किया गया है कि जमीन के रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ होने के बाद किसान को किन-किन सुविधाओं से वंचित किया जाएगा. हालांकि, मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इसका असर सरकारी योजनाओं, कर्ज या जमीन से जुड़े कुछ कामों पर पड़ सकता है. इसलिए अंतिम नियम आने के बाद ही इसके वास्तविक असर की तस्वीर साफ होगी. अगर उसी खेत में दोबारा पराली जलाने की घटना सामने आती है या किसान तय समय में पर्यावरणीय जुर्माना जमा नहीं करता है, तो ‘रेड एंट्री’ की अवधि और 15 महीने बढ़ाने का प्रावधान प्रस्तावित है.

जुर्माने के पैसे से किसानों को क्या फायदा होगा?

मसौदे में सिर्फ जुर्माना वसूलने की बात नहीं है, बल्कि उससे मिलने वाली रकम के इस्तेमाल का भी प्रावधान रखा गया है. यह पैसा संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या प्रदूषण नियंत्रण समिति को दिया जाएगा. इस रकम का इस्तेमाल फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी, बायोमास के भंडारण और इस्तेमाल, फसल विविधीकरण, रिसर्च और किसानों की ट्रेनिंग व जागरूकता कार्यक्रमों में किया जा सकेगा.

यूपी में पराली और प्रदूषण पर सरकार की तैयारी

इसी बीच, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के साथ दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता को लेकर बैठक की. बैठक में सर्दियों से पहले प्रदूषण रोकने के उपायों को तेज करने और अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया. पराली जलाने के मुद्दे पर यूपी में फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी की उपलब्धता में कमियों को दूर करने, किसानों की ट्रेनिंग बढ़ाने और जागरूकता अभियान तेज करने की बात कही गई.

बैठक में सिर्फ पराली ही नहीं, बल्कि सड़क की धूल, औद्योगिक प्रदूषण, निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाला कचरा, नगर निकायों के ठोस कचरे और बायोमास जलाने जैसे मुद्दों की भी समीक्षा हुई. भूपेंद्र यादव ने इलेक्ट्रिक बसों और चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने, सड़कों की सफाई बेहतर करने और औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण की निगरानी मजबूत करने पर भी जोर दिया. सरकार की कोशिश है कि सर्दियों से पहले दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर एक साथ काम किया जाए.

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