सोयाबीन में दिखे ये 2 गोल छल्ले तो समझिए खतरा बड़ा है, गर्डल बीटल से ऐसे बचाएं फसल, इस बड़े खुलासे से मचा हड़कंप – एग्रीवेट

atulpradhan
4 Min Read

एग्रीवेट: Soybean Crop: सोयाबीन की फसल इस समय कई क्षेत्रों में अच्छी स्थिति में है, लेकिन कुछ खेतों में गर्डल बीटल और अलग-अलग तरह की इल्लियों का हल्का प्रकोप देखने को मिल रहा है. ऐसे में किसानों को बिना जरूरत कीटनाशकों का छिड़काव करने के बजाय पहले फसल की अच्छी तरह निगरानी करने की सलाह दी गई है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, समय रहते कीट की पहचान कर उचित उपचार करने से फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है.

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, इस समय अधिकांश खेतों में सोयाबीन की फसल सामान्य और स्वस्थ स्थिति में है. अनुकूल मौसम के कारण कई जगहों पर पिछले वर्षों की तुलना में कीटों का प्रकोप भी कम है. हालांकि कुछ खेतों में गर्डल बीटल, सेमीलूपर और बिहार हेयरी कैटरपिलर जैसी इल्लियों की समस्या सामने आ सकती है. किसानों को सलाह है कि वे नियमित रूप से खेत में जाकर पौधों की जांच करें. हर खेत की स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी दूसरे किसान को देखकर उसी दवा का इस्तेमाल करना सही तरीका नहीं है. जरूरत से ज्यादा रसायनों के इस्तेमाल से खेती की लागत बढ़ने के साथ पर्यावरण पर भी अनावश्यक असर पड़ सकता है.

गर्डल बीटल मुख्य रूप से सोयाबीन के तने या डंडी को नुकसान पहुंचाता है. इसके प्रकोप की पहचान पौधे के ऊपरी हिस्से के सूखने से की जा सकती है. जिस जगह कीट हमला करता है, वहां तने पर दो गोल छल्ले यानी रिंग जैसे निशान दिखाई देते हैं. इन्हीं छल्लों के बीच मादा कीट अंडे देती है. बाद में निकलने वाली इल्ली तने के अंदर प्रवेश कर नीचे की ओर नुकसान पहुंचाती है. इससे पौधे का ऊपरी हिस्सा सूख सकता है और फलियों  में बनने वाले दाने भी कमजोर रह सकते हैं. इसलिए ऐसे लक्षण दिखाई देने पर खेत की तुरंत जांच करना जरूरी है.

सोयाबीन में कीटों  का समय पर प्रबंधन उत्पादन और दाने की गुणवत्ता दोनों के लिए महत्वपूर्ण है. गर्डल बीटल जैसे कीट पौधे के तने के अंदर नुकसान करते हैं, इसलिए बाहर से लक्षण दिखाई देने तक कई बार पौधे को नुकसान हो चुका होता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, किसान सबसे पहले खेत की निगरानी करें और कीट के लक्षणों की सही पहचान करें. इसके बाद जरूरत होने पर विशेषज्ञ की सलाह से ही उचित कीटनाशक और सही मात्रा का इस्तेमाल करें. समय पर की गई निगरानी और उपचार से फसल को अनावश्यक नुकसान और अतिरिक्त खर्च दोनों से बचाया जा सकता है.

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *