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Sarson Mandi Bhav: देशभर की मंडियों में सरसों की आवक जारी है. कहीं दाम 9 हजार को पार कर चुके हैं, तो कहीं किसानों को MSP के बराबर भी दाम नहीं मिल रहा है. जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है. आइए जानते हैं देशभर की मंडियों का हाल.
एक्सपर्ट्स की मानें तो इस बार सरसों का उत्पादन 14 मिलियन टन (एमटी) तक पहुंच सकता है. वहीं, व्यापारियों का कहना है की सस्ते खाद्य तेलों के आयात के चलते देश में सरसों तेल की खपत कम हुई है. जिस वजह से तिलहन फसलों की कीमतों में सुस्ती देखी जा रही है.
बिजनेसलाइन में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी आंकड़े बताते हैं की 2022-23 में सरसों का उत्पादन 12.64 मिलियन टन था और सरकार ने इस वर्ष के लिए लक्ष्य 13.1 मिलियन टन निर्धारित किया है. जबकि, इस बार सरसों की बुवाई 100.44 लाख हेक्टेयर (एलएच) में हुई है. जो पिछले साल 97.97 लाख हेक्टेयर था. मौजूदा फसल स्थितियों के आधार पर, यह माना जा सकता है कि फसल का आकार 14 मिलियन टन से कम नहीं होगा. इस वृद्धि के लिए विदर्भ और मराठवाड़ा के साथ-साथ झारखंड, असम, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड क्षेत्रों में सरसों के बढ़े हुए रकबे को जिम्मेदार माना जा सकता है.
केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय के एगमार्कनेट पोर्टल के अनुसार, गुरुवार (18 अप्रैल) को कर्नाटक के बेंगलुरु मंडी में सरसों का सबसे अच्छा दाम मिला. जहां, सरसों 9500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव में बिकी. इसी तरह, कर्नाटक की शिमोगा मंडी में सरसों 8000 रुपये/क्विंटल, पश्चिम बंगाल की आसनसोल मंडी में 6000 रुपये/क्विंटल, बेलडांगा मंडी में 6700 रुपये/क्विंटल और दुर्गापुर मंडी में 6200 रुपये/क्विंटल के भाव में बिकी. वहीं, बात अगर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की करें तो यहां सरसों के दाम सामान्य बने हुए हैं. कुछ मंडियों में MSP पर सरसों की खरीद हो रही है. जबकि, कहीं दाम MSP से नीचे चल रहे हैं.
बता दें कि किसी भी फसल का दाम उसकी क्वालिटी पर भी निर्भर करता है. ऐसे में व्यापारी क्वालिटी के हिसाब से ही दाम तय करते हैं. फसल जितनी अच्छी क्वालिटी की होगी, उसके उतने ही अच्छे दाम मिलेंगे. अगर आप भी अपने राज्य की मंडियों में अलग-अलग फसलों का दाम देखना चाहते हैं, तो आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पूरी लिस्ट चेक कर सकते हैं.
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