एग्रीवेट: रबी सीजन की फसलों की बुवाई, मिट्टी की जांच, जलवायु आदि को लेकर राज्यों के हिसाब से फसलों को अंतिम रूप देने का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया है. इसके लिए अगले सप्ताह 28 और 29 सितंबर को दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में रबी कॉन्फ्रेंस होगी. इसमें सभी राज्यों के कृषि मंत्री, कृषि सचिव और अन्य कृषि विभागों के अधिकारी शामिल होंगे. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत को कृषि में दुनिया का सिरमौर बनाना है. इसके लिए जलवायु, मिट्टी और पानी की उपलब्धता के अनुसार फसलों का चयन किया जाना जरूरी है.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हैदराबाद में साउथ जोन एग्रीकल्चर कॉन्फ्रेंस में बताया कि 28 और 29 सितंबर को दिल्ली स्थित पूसा संस्थान में रबी कांफ्रेंस आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी राज्यों के कृषि मंत्री और अधिकारी अपनी-अपनी टीम के साथ रबी सीजन का पूरा प्लान लेकर आएंगे. इसमें यह तय किया जाएगा कि रबी में कौन सी फसल कितने क्षेत्र में बोई जाएगी. कांफ्रेंस में इन तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा. इसके आधार पर बीज की उपलब्धता, फर्टिलाइजर की आवश्यकता और अन्य जरूरी संसाधनों का आकलन कर आगे की योजना तैयार की जाएगी.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राज्यों को जब सुविधा हो, वो 15 दिन या 20 दिन का अभियान तय कर सकते हैं और उसी समय भारत सरकार के वैज्ञानिक राज्यों में पहुंचेंगे. हमारे पास 16 हजार साइंटिस्ट हैं. आईसीएआर के संस्थान, केवीके और कृषि विश्वविद्यालय केवल रिसर्च करने के लिए नहीं हैं, बल्कि रिसर्च को किसानों तक पहुंचाने के लिए भी हैं. उन्होंने कहा कि जब तक किसान और वैज्ञानिक आपस में नहीं बैठेंगे, रिसर्च जब तक किसान के पास नहीं पहुंचेगी, लैब से लैंड तक नहीं पहुंचेगी, तब तक काम चलेगा नहीं.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के सामने हर दिन कई तरह की समस्याएं आती हैं और हर समस्या के लिए किसान कहीं भागकर नहीं जा सकता. इसलिए केवल मोबाइल पर एक नंबर लगाकर उचित सलाह मिल सके, इसके लिए भारत विस्तार की व्यवस्था की गई है. उन्होंने कहा कि फिलहाल यह हिंदी और अंग्रेजी भाषा में है, लेकिन इसे तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम सहित 13 क्षेत्रीय भाषाओं में शुरू किया जाएगा. किसान अपनी भाषा में सवाल पूछेगा और उसे उसी भाषा में जवाब मिल सकेगा.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एग्री स्टैक कितना महत्वपूर्ण है, यह सभी राज्यों ने समझा होगा. फार्मर आईडी बनाने के काम में काफी प्रगति हुई है. तेलंगाना और कर्नाटक 75 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गए हैं. वहीं तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना में जियो रिफरेंसिंग का काम भी अच्छा हुआ है. उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे में अंडमान निकोबार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल ने पूर्णता हासिल की है. लेकिन जहां फार्मर आईडी बनाने में अभी और मेहनत की जरूरत है, उनमें केरल, तमिलनाडु और अंडमान निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि निश्चित समय सीमा के भीतर फार्मर आईडी का काम पूरा करना जरूरी है, क्योंकि आने वाले समय में कृषि क्षेत्र की कई व्यवस्थाएं इस पर निर्भर रहेंगी। कोई राज्य पीछे नहीं रह जाए, यह मेरी अपेक्षा है.