UP को फूड प्रोसेसिंग का बड़ा हब बनाने की तैयारी, किसानों से महिलाओं तक.. खुलेंगे कमाई के नए रास्ते – एग्रीवेट

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एग्रीवेट: UP Food Processing: उत्तर प्रदेश में खेती के साथ फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने की तैयारी तेज हो गई है. राज्य सरकार का जोर इस बात पर है कि किसानों की फसल सिर्फ कच्चे माल के रूप में न बिके, बल्कि उसकी प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के बाद उसे ज्यादा कीमत मिले. इससे किसानों की कमाई बढ़ाने के साथ गांवों में रोजगार के नए मौके भी तैयार किए जा सकें. उपमुख्यमंत्री और फूड प्रोसेसिंग विभाग के मंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लखनऊ में ‘इंडिया फूड एक्सपो-2026’ के 11वें संस्करण का उद्घाटन करते हुए सरकार की इस योजना की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि राज्य में फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में निवेश, नई तकनीक और नए प्रयोगों को बढ़ावा दिया जा रहा है.

उत्तर प्रदेश में बड़ी मात्रा में गेहूं, धान, फल, सब्जियां, दूध और दूसरे कृषि उत्पाद पैदा होते हैं. लेकिन कई बार किसानों को अपनी उपज कच्चे रूप में ही बेचनी पड़ती है. ऐसे में सरकार का फोकस फसल की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग को बढ़ाने पर है. मौर्य के मुताबिक, राज्य में मेगा फूड पार्क, कोल्ड चेन नेटवर्क और एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं. इन सुविधाओं से खेत से निकलने वाले उत्पाद को सुरक्षित तरीके से बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी. कोल्ड स्टोरेज और बेहतर परिवहन व्यवस्था होने से खासकर फल और सब्जियों की खराब होने वाली मात्रा को कम किया जा सकता है.

किसानों की उपज को मिलेगा ज्यादा मूल्य

फूड प्रोसेसिंग बढ़ने का सीधा फायदा किसानों को भी मिल सकता है. उदाहरण के लिए किसी फल या सब्जी को सीधे बेचने के बजाय उससे जैम, अचार, सॉस या पैकेज्ड फूड तैयार किया जाए तो उसकी बाजार कीमत बढ़ सकती है. सरकार कृषि और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दे रही है. इससे स्थानीय स्तर पर ही किसानों की उपज की प्रोसेसिंग हो सकेगी और तैयार उत्पाद को बड़े बाजारों तक पहुंचाने के रास्ते खुलेंगे.

महिलाओं को कारोबार से जोड़ने की तैयारी

फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में ग्रामीण महिलाओं को भी आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. इसके लिए फूड प्रोसेसिंग विभाग ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म फूड प्रोसेसिंग उद्यम औपचारिकीकरण योजना यानी PMFME को राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जोड़ा है. इसके तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को अचार, पैकेज्ड फूड, मोटे अनाज से बने उत्पाद और दूसरे खाद्य पदार्थों की प्रोसेसिंग व ब्रांडिंग के लिए 35 फीसदी तक सब्सिडी और वित्तीय मदद दी जा रही है. इससे गांवों में काम करने वाली महिलाओं को छोटे स्तर पर अपना कारोबार शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने का मौका मिल सकता है. सरकार का लक्ष्य ऐसी महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ाना भी है.

युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के रास्ते

फूड प्रोसेसिंग सिर्फ किसानों और महिलाओं तक सीमित नहीं है. इस क्षेत्र में युवाओं के लिए भी रोजगार और कारोबार के अवसर पैदा करने की योजना है. केशव प्रसाद मौर्य के मुताबिक, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना और जिला स्तर पर चल रहे प्रशिक्षण केंद्रों के जरिए युवाओं को फूड प्रोसेसिंग से जुड़े काम के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इसके अलावा कृषि आधारित नए स्टार्टअप को इन्क्यूबेशन सेंटर और आधुनिक तकनीक से जोड़ने की कोशिश की जा रही है. इससे युवाओं को अपना कारोबार शुरू करने के लिए जरूरी तकनीकी जानकारी और दूसरी सुविधाएं मिल सकती हैं.

कृषि और उद्योग साथ आए तो बढ़ेगी कमाई

उत्तर प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के पीछे एक बड़ा मकसद कृषि और उद्योग को एक-दूसरे से जोड़ना है. जब किसान की उपज की प्रोसेसिंग राज्य में ही होगी तो स्थानीय स्तर पर कई तरह के काम पैदा होंगे. इसमें पैकेजिंग, स्टोरेज, परिवहन, प्रोसेसिंग और बिक्री से जुड़े रोजगार शामिल हैं. सरकार का मानना है कि कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है. साथ ही किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में भी मदद मिल सकती है.

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