एग्रीवेट: हरियाणा के करनाल में धान की कटाई शुरू होने में अभी समय है, लेकिन कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने पराली प्रबंधन की तैयारी शुरू कर दी है. विभाग का लक्ष्य इस सीजन में खेतों में पराली जलाने की घटनाओं को शून्य करना है. इसके लिए किसानों को पराली जलाने के बजाय उसके प्रबंधन के दूसरे विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे. विभाग इन-सीटू और एक्स-सीटू दोनों तरीकों से धान के अवशेष के प्रबंधन पर जोर दे रहा है. इन-सीटू में पराली को खेत में ही मिलाकर उसका प्रबंधन किया जाता है, जबकि एक्स-सीटू में पराली को खेत से बाहर निकालकर दूसरे कामों में इस्तेमाल किया जाता है.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल करलान जिले में करीब 4.5 लाख एकड़ में धान की खेती की गई है. धान की कटाई के बाद करीब 9 लाख मीट्रिक टन पराली निकलने का अनुमान है. अनुमानित पराली में से करीब 1 लाख मीट्रिक टन का इस्तेमाल पशुओं के चारे और पैकेजिंग फैक्ट्रियों में किया जाएगा. वहीं, करीब 1.5 लाख मीट्रिक टन पराली किसान पानीपत स्थित इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) के 2G इथेनॉल प्लांट को देंगे.
पराली प्रबंधन के लिए 77 कलेक्शन सेंटर तैयार
बाकी बची पराली का प्रबंधन इन-सीटू और एक्स-सीटू तरीकों से किया जाएगा. इसके तहत पराली को खेत में ही मिलाने के साथ-साथ उसे खेत से बाहर निकालकर अलग-अलग उपयोग में लाया जाएगा. अधिकारियों के मुताबिक, पराली खरीदने के लिए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने 7 कलेक्शन सेंटर बनाए हैं. इसके अलावा, एक्स-सीटू पराली प्रबंधन के तहत अलग-अलग गांवों में किसानों और किसान समूहों ने करीब 70 अन्य कलेक्शन सेंटर तैयार किए हैं.
पराली प्रबंधन के लिए किसानों को जागरूक करेंगी टीमें
डिप्टी कमिश्नर डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने कहा कि पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने और किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक करने के लिए विभिन्न विभागों के करीब 750 कर्मचारियों और अधिकारियों को लगाया गया है. ये कर्मचारी किसानों को पराली प्रबंधन के दूसरे तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे. डिप्टी कमिश्नर डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने कहा कि पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए गांव, ब्लॉक, उपमंडल और जिला स्तर पर समितियां बनाई गई हैं. इन समितियों में एसडीएम, तहसीलदार, बीडीपीओ, कृषि और बागवानी अधिकारी के साथ पशुपालन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी शामिल हैं.
पराली जलाने वालों पर होगी कार्रवाई
उन्होंने कहा कि ये टीमें खेतों में आग लगाने की घटनाओं पर नजर रखेंगी, उनकी जानकारी दर्ज करेंगी और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेंगी. कानून का सख्ती से पालन कराने के लिए पुलिसकर्मी भी इन टीमों में शामिल रहेंगे. उप कृषि निदेशक (DDA) डॉ. जसविंदर सिंह ने कहा कि पानीपत स्थित IOCL के 2G इथेनॉल प्लांट तक जरूरत के मुताबिक धान की पराली पहुंचाने की व्यवस्था की गई है. इसके लिए अलग-अलग जगहों पर कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं और संबंधित इलाकों के किसानों को इसकी जानकारी दी गई है. उन्होंने कहा कि पराली जलाने के बजाय उसका प्रबंधन करने वाले किसानों को सरकार की ओर से 1,200 रुपये प्रति एकड़ की सहायता दी जाएगी.
पराली प्रबंधन के लिए जिले में पर्याप्त मशीनरी उपलब्ध
DDA के मुताबिक, जिले में करीब 55,000 किसान धान की खेती के लिए पंजीकृत हैं. पराली प्रबंधन के लिए जिले में पर्याप्त कृषि मशीनरी भी उपलब्ध है. इसमें सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, हैप्पी सीडर, श्रब मास्टर/रोटरी स्लेशर, हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, जीरो-टिल सीड ड्रिल, सुपर सीडर, बेलर, स्ट्रॉ रेक, फसल रीपर और धान स्ट्रॉ चॉपर जैसी मशीनें शामिल हैं. विभाग ने पिछले वर्षों में अपनाए गए पराली प्रबंधन के उपायों को इस साल भी जारी रखा है. अधिकारियों के मुताबिक, इन प्रयासों से जिले में खेतों में पराली जलाने की घटनाओं में लगातार कमी आई है.
2025 में पराली जलाने के 23 मामले सामने आए