एग्रीवेट: UPI से जुड़े नए नियमों की चर्चा के बीच बैंक ग्राहकों के लिए जीरो बैलेंस खाते का विकल्प भी खास है. 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा UPI P2M लेनदेन पर संशोधित MDR ढांचा लागू होगा. 2,000 रुपये तक के UPI लेनदेन को फ्री रखने की व्यवस्था की गई है. हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक NPCI सर्कुलर सूची में इन सभी प्रावधानों की स्पष्ट पुष्टि नहीं मिली है. वहीं, बैंक ग्राहकों के लिए बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट (BSBDA) में न्यूनतम बैलेंस या शुरुआती जमा राशि रखने की जरूरत नहीं होती. इस खाते में ATM/डेबिट कार्ड, मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग जैसी सुविधाएं मिलती हैं. ग्राहक अपने मौजूदा सेविंग्स अकाउंट को भी BSBDA में बदल सकते हैं. BSBDA की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें न्यूनतम बैलेंस बनाए रखना जरूरी नहीं है. यानी सामान्य सेविंग अकाउंट की तरह मिनिमम बैलेंस नहीं रखने पर जुर्माने की चिंता नहीं रहती. यह खाता उन ग्राहकों के लिए बनाया गया है, जिन्हें बुनियादी बैंकिंग सुविधाएं आसानी से चाहिए. ग्राहक अपने मौजूदा सेविंग अकाउंट को भी BSBDA में बदलने का विकल्प बैंक के नियमों के अनुसार ले सकते हैं. BSBDA में ATM या डेबिट कार्ड की सुविधा दी जाती है और आरबीआई के नियमों के अनुसार इस कार्ड पर सालाना शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए. खाते से हर महीने कम से कम चार निकासी मुफ्त होनी चाहिए. इसमें ATM के अलावा बैंक शाखा से नकद निकासी और कुछ अन्य निर्धारित माध्यम भी शामिल हैं. इसके अलावा खाते में पैसे जमा करने पर मासिक संख्या की कोई सीमा नहीं है. पासबुक और अन्य सुविधाएं बैंक की उपलब्ध व्यवस्था और खाते की शर्तों के अनुसार मिल सकती हैं. इसलिए खाता खुलवाने से पहले बैंक से सभी सुविधाओं और संभावित शुल्क की जानकारी लेना जरूरी है. UPI आज रोजमर्रा के भुगतान का बड़ा माध्यम बन चुका है. NPCI के आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में UPI पर 24,508.96 मिलियन यानी करीब 2,450 करोड़ लेनदेन हुए और इनकी कुल वैल्यू करीब 29.82 लाख करोड़ रुपये रही. UPI, NEFT, RTGS और IMPS जैसे डिजिटल ट्रांसफर को BSBDA की सामान्य नकद निकासी से अलग समझना जरूरी है. आरबीआई के BSBDA FAQ में चार मुफ्त निकासी की गणना में RTGS और NEFT समेत कई लेनदेन माध्यमों को शामिल किया गया है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर डिजिटल ट्रांजैक्शन चार निकासी की सीमा से पूरी तरह बाहर है. 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा P2M UPI लेनदेन के लिए MDR ढांचे में बदलाव की बात कही गई है. इसमें 2,000 रुपये तक के उपभोक्ता लेनदेन को फ्री रखने और छोटे व्यापारियों के लिए शून्य MDR की व्यवस्था का दावा किया गया है. हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक NPCI सर्कुलर सूची में इन सभी प्रावधानों की स्पष्ट पुष्टि नहीं मिली है. सरकारी आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर मिल रही है कि है कि MDR किसी दबाव में नहीं है और UPI पर जीएसटी लगने की खबर गलत है. सूत्रों के मुताबिक, जीएसटी को इनपुट टैक्स क्रेडिट में समायोजित किया जाएगा. सरकार को उम्मीद है कि रोलआउट के बाद UPI लेनदेन में गिरावट नहीं आएगी.