एग्रीवेट: भारत का सोयाबीन आयात ऑयल ईयर 2025-26 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है. सितंबर में खत्म हो रहे इस ऑयल ईयर में करीब 10 लाख टन सोयाबीन आयात होने का अनुमान है. घरेलू बाजार में सप्लाई की कमी को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है. हालांकि, पिछले ऑयल ईयर में सिर्फ 0.02 लाख टन सोयाबीन का आयात हुआ था. सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के ताजा अनुमान के मुताबिक, अक्टूबर से अगस्त के बीच 9.34 लाख टन सोयाबीन का आयात हो चुका है. सितंबर की खरीद को जोड़ने पर कुल आयात 9.5 लाख टन से ज्यादा हो सकता है. बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, बारिश की कमी और कमजोर मॉनसून का असर खरीफ 2026 की सोयाबीन फसल पर पड़ने की आशंका है. इस साल सोयाबीन का रकबा भी घटा है. ऐसे में नए ऑयल ईयर में भी सोयाबीन का आयात जारी रहने की संभावना है. ऐसे भारत में सोयाबीन आयात का पिछला रिकॉर्ड 2022-23 में करीब 7 लाख टन था. भारत पहले सोयाबीन का निर्यात करता था, लेकिन 2018-19 से देश शुद्ध आयातक बन गया. इसके बाद 2022-23 तक सोयाबीन का आयात बढ़ता रहा. 2023-24 और 2024-25 में इसमें कमी आई, लेकिन चालू वर्ष में आयात अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचने का अनुमान है. भारत मुख्य रूप से गैर-जेनेटिकली मॉडिफाइड (Non-GM) सोयाबीन का आयात करता है. इसकी ज्यादातर खरीद अफ्रीका के कम विकसित देशों से होती है. इनमें नाइजर, टोगो और नाइजीरिया प्रमुख हैं, जहां बड़े पैमाने पर गैर-GM सोयाबीन उगाई जाती है. सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के अनुमान के मुताबिक, 2025-26 में सोयाबीन उत्पादन 110.26 लाख टन रह सकता है. यह पिछले साल के 128.82 लाख टन से करीब 14 फीसदी कम है. रकबा घटने और मौसम की अनिश्चितता से उत्पादन प्रभावित होने का अनुमान है. वहीं, 2025-26 में सोयाबीन की क्रशिंग 104.50 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 113.50 लाख टन से कम है. सोयाबीन की कम क्रशिंग के कारण 2025-26 में सोयाबीन मील यानी खली का उत्पादन घटकर 82.46 लाख टन रहने का अनुमान है. पिछले साल इसका उत्पादन 89.56 लाख टन रहा था. वहीं, पशु आहार क्षेत्र में खली की खपत बढ़कर 63 लाख टन और खाद्य क्षेत्र में खपत 9 लाख टन रहने का अनुमान है. सोयाबीन मील का निर्यात भी घटकर 10 लाख टन रह सकता है, जो पिछले साल 20.23 लाख टन था. कीमतों में अंतर यानी बेहतर भाव नहीं मिलने के कारण निर्यात में कमी आई है. कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस खरीफ सीजन में करीब 122.08 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन बोई गई है, जबकि पिछले साल यह रकबा 123 लाख हेक्टेयर था. महाराष्ट्र और कर्नाटक समेत प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में बारिश की कमी से फसल प्रभावित होने की आशंका है. वहीं, USDA Post ने 2026-27 के लिए भारत में सोयाबीन के रकबे और उत्पादन का अनुमान घटाया है. अनियमित मॉनसून और किसानों का कपास व मक्का की ओर रुख इसका कारण बताया गया है. इसके मुताबिक, सोयाबीन का कटाई वाला रकबा पहले के 1.12 करोड़ हेक्टेयर के अनुमान से घटकर 1.05 करोड़ हेक्टेयर रह सकता है. USDA के मुताबिक, महाराष्ट्र में बुवाई के समय अनियमित बारिश से सोयाबीन की बुवाई प्रभावित हुई और कुछ इलाकों में दोबारा बुवाई करनी पड़ी. इसके अलावा, बेहतर भाव मिलने से किसानों ने सोयाबीन का रकबा कपास और मक्का की ओर भी बढ़ाया है. USDA ने 2026-27 में भारत के सोयाबीन आयात का अनुमान 5 लाख टन लगाया है. यह आयात बेनिन, नाइजर और टोगो में अच्छी फसल होने पर निर्भर करेगा. इन देशों से सोयाबीन आयात पर फिलहाल शून्य टैरिफ की व्यवस्था है.