एग्रीवेट: देश में प्रीमियम किस्म के चावल की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले करीब 50 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है. इस तेजी की मुख्य वजह इस साल चावल का उत्पादन कम रहने की आशंका है. खासकर दक्षिण भारत में कम बारिश के कारण किसानों ने चावल की खेती का रकबा घटाया है. द राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीवी कृष्णा राव के मुताबिक, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में पोन्नी और सोना मसूरी जैसी प्रीमियम किस्मों की खेती प्रभावित हुई है. इन राज्यों में इन किस्मों का रकबा 30-40 फीसदी तक कम हो सकता है. नई दिल्ली के ट्रेड एनालिस्ट एस. चंद्रशेखरन ने बिजनेसलाइन से कहा कि सिर्फ दक्षिण भारत में ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में भी इस खरीफ सीजन में धान की खेती का रकबा घटा है. इससे आने वाले दिनों में चावल की कीमतों पर दबाव बने रहने की संभावना है. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, इस साल देश में धान की खेती का रकबा 16.97 लाख हेक्टेयर घटकर 426.81 लाख हेक्टेयर रह गया है. पिछले साल इसी अवधि में धान का रकबा 443.78 लाख हेक्टेयर था. राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीवी कृष्णा राव ने अनुमान जताया है कि इस साल धान का उत्पादन 1 करोड़ टन से ज्यादा घट सकता है. कृषि मंत्रालय के क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप के मुताबिक, धान के रकबे में सबसे ज्यादा कमी कर्नाटक में 4.54 लाख हेक्टेयर और तेलंगाना में 4.46 लाख हेक्टेयर रही है. इसके अलावा आंध्र प्रदेश में 1.90 लाख, उत्तर प्रदेश में 1.84 लाख, मध्य प्रदेश में 1.75 लाख, तमिलनाडु में 1.40 लाख, महाराष्ट्र में 1.15 लाख और झारखंड में 0.97 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है. धान की खेती का रकबा घटने की बड़ी वजह दक्षिण भारत में कम बारिश बताई जा रही है. 17 सितंबर तक दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में 28 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है. कम बारिश के कारण कई राज्यों में किसानों ने धान की खेती कम की है. वहीं, रकबा घटने का असर चावल की कीमतों पर भी दिख रहा है. आंध्र प्रदेश में ग्रेड-1 BPT चावल का भाव बढ़कर 6,200 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है. पिछले साल इसी समय यह करीब 4,000 रुपये प्रति क्विंटल था. यानी एक साल में इसकी कीमत में करीब 55 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. देश में सोना मसूरी, पोन्नी जैसी प्रीमियम चावल की किस्मों के दाम करीब 80 रुपये प्रति किलो पहुंच गए हैं. कारोबारियों का कहना है कि इस साल इन किस्मों का उत्पादन कम रहने की आशंका को देखते हुए बाजार में कीमतें बढ़ी हैं. दिल्ली के निर्यातक राजेश पाहाड़िया जैन ने कहा कि बाजार में प्रीमियम चावल की कीमतों में आगे भी तेजी रहने की उम्मीद है. उन्होंने बताया कि इन किस्मों के दाम बढ़कर बासमती के करीब पहुंच सकते हैं. हालांकि, कीमतें बासमती से ऊपर जाने की संभावना कम है, क्योंकि ऐसी स्थिति में ग्राहक सुगंधित बासमती चावल की ओर रुख कर सकते हैं. भारत ने 2025-26 सीजन में रिकॉर्ड 15.40 करोड़ टन चावल का उत्पादन किया था. इसमें खरीफ सीजन का उत्पादन करीब 12.45 करोड़ टन रहा, जो अब तक का सबसे ज्यादा उत्पादन है. सरकार के पास फिलहाल करीब 3.91 करोड़ टन चावल का स्टॉक है. इसके अलावा 3.08 करोड़ टन धान भी उपलब्ध है, जिससे करीब 2 करोड़ टन से ज्यादा चावल निकाला जा सकता है. वहीं, ट्रेड एनालिस्ट एस. चंद्रशेखरन ने कहा कि सरकारी स्टॉक होने के बावजूद प्रीमियम चावल की समस्या हल नहीं होती, क्योंकि इन खास किस्मों का उत्पादन लगातार घट रहा है.