एग्रीवेट: Poultry Farming Subsidy Scheme: उत्तर प्रदेश में खेती के साथ मुर्गी पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश कुक्कुट विकास नीति-2022 लागू है. इस नीति का उद्देश्य व्यावसायिक पोल्ट्री फार्म स्थापित करने वाले लोगों को वित्तीय और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है. पात्र किसान और उद्यमी बैंक लोन के साथ सरकारी प्रोत्साहन का लाभ लेकर पोल्ट्री यूनिट शुरू कर सकते हैं. नीति की नोडल एजेंसी पशुपालन विभाग है. 10 हजार मुर्गियों की क्षमता वाली पोल्ट्री यूनिट स्थापित करने में परियोजना के आकार और सुविधाओं के हिसाब से बड़ा निवेश हो सकता है. इसमें मुर्गियों के लिए शेड, उपकरण, पानी, बिजली, दाना और दूसरी जरूरी व्यवस्थाएं शामिल होती हैं. ऐसी यूनिट शुरू करने से पहले किसान को जमीन, परियोजना की लागत और बैंक फाइनेंस की पूरी योजना तैयार करनी होगी. सिर्फ सरकारी सहायता के भरोसे पूरा प्रोजेक्ट शुरू नहीं किया जा सकता. परियोजना के लिए लाभार्थी को अपनी ओर से भी मार्जिन मनी की व्यवस्था करनी होगी. उत्तर प्रदेश सरकार की नीति के अनुसार कमर्शियल लेयर फार्म के लिए परियोजना की फाइनेंसिंग में 30% मार्जिन मनी और 70 फीसदी बैंक लोन का अनुपात रखा गया है. यानी परियोजना की लागत के एक हिस्से की व्यवस्था किसान को खुद करनी होगी, जबकि बाकी रकम बैंक लोन के जरिए जुटाई जा सकती है. उदाहरण के तौर पर अगर किसी परियोजना की लागत 1 करोड़ रुपये मानी जाए तो करीब 30 लाख रुपये मार्जिन मनी के तौर पर और करीब 70 लाख रुपये बैंक फाइनेंस के रूप में हो सकते हैं. हालांकि, वास्तविक परियोजना लागत और स्वीकृत लोन बैंक की जांच और योजना के नियमों पर निर्भर करेगा. पोल्ट्री यूनिट लगाने वालों के लिए सरकार की नीति में ब्याज से जुड़ी राहत भी दी गई है. कमर्शियल लेयर फार्म के लिए बैंक से लिए गए लोन पर 7 प्रतिशत ब्याज की प्रतिपूर्ति 5 साल तक करने का प्रावधान है. ब्रॉयलर पैरेंट फार्म के लिए भी इसी तरह 7 प्रतिशत ब्याज प्रतिपूर्ति 5 साल तक दी जा सकती है. इसका मतलब यह है कि पात्र लाभार्थी को बैंक लोन की लागत का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, ब्याज प्रतिपूर्ति और लोन की मंजूरी संबंधित नियमों और पात्रता के अनुसार होगी. उत्तर प्रदेश कुक्कुट विकास नीति के तहत पात्र पोल्ट्री यूनिट को 10 साल तक बिजली शुल्क में 100 प्रतिशत छूट का प्रावधान है. इसके अलावा यूनिट स्थापित करने के लिए खरीदी या लीज पर ली गई जमीन पर 100 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी छूट भी दी जाती है. सरकार की नीति में लाभार्थियों के लिए प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी और उद्यमिता विकास की व्यवस्था का भी प्रावधान है. इससे नए लोगों को पोल्ट्री व्यवसाय शुरू करने और उसे बेहतर तरीके से चलाने में मदद मिल सकती है. किसान या उद्यमी को आवेदन करने से पहले परियोजना की वर्तमान पात्रता, बैंक फाइनेंस, जरूरी दस्तावेज और स्वीकृत लागत की जानकारी पशुपालन विभाग से जरूर लेनी चाहिए. योजना के लाभ परियोजना के प्रकार और लागू नियमों के अनुसार तय होंगे.