एग्रीवेट: Paddy Straw Management: धान की कटाई के बाद खेतों में बचने वाली पराली अब किसानों के लिए कमाई का नया जरिया बन सकती है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI), करनाल में पराली को पौष्टिक पशु चारे में बदलने की नई तकनीक विकसित की जा रही है. इसे स्ट्रॉलेज (Strawlage) तकनीक कहा जाता है. इसमें धान की पराली के साथ आलू के अवशेष, मटर की फलियां और कृषि आधारित उद्योगों से निकलने वाले दूसरे उप-उत्पाद मिलाकर पशुओं के लिए चारा तैयार किया जाता है. ICAR के मुताबिक, इस तकनीक से पशुपालकों को बेहतर चारे का विकल्प मिलने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और कारोबार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं.
ICAR-NDRI के अनुसार, धान की पराली को पशुओं के लिए अधिक उपयोगी बनाने के उद्देश्य से स्ट्रॉलेज तकनीक विकसित की जा रही है. सामान्य तौर पर धान की पराली में पोषक तत्वों की मात्रा सीमित होती है और इसे पशुओं को खिलाने में भी कई परेशानियां आती हैं. नई तकनीक के जरिए पराली को दूसरे कृषि अवशेषों के साथ मिलाकर उसकी चारा गुणवत्ता सुधारने की कोशिश की जा रही है. इससे पराली का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और पशुपालकों को चारे का एक अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है.
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इस तकनीक में धान की पराली के साथ वेट डिस्टिलर्स ग्रेन्स (Wet Distillers’ Grains), आलू के अवशेष और मटर की फलियों का इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया और जाइलानेज (Xylanase) एंजाइम भी मिलाए जाते हैं. इन सामग्रियों को एक साथ मिलाकर नियंत्रित तरीके से किण्वित किया जाता है. इस प्रक्रिया को को-एन्साइलिंग (Co-ensiling) कहा जाता है. इसका उद्देश्य पराली की चारा गुणवत्ता और उपयोगिता बढ़ाना है, ताकि इसे पशुओं के आहार में शामिल किया जा सके.
ICAR के मुताबिक, स्ट्रॉलेज तकनीक से ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चारा तैयार करने वाले छोटे उद्योग शुरू करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं. किसान और ग्रामीण उद्यमी धान की पराली तथा दूसरे कृषि अवशेषों का इस्तेमाल करके मूल्यवर्धित चारा उत्पादन का कारोबार विकसित कर सकते हैं. इससे पराली को केवल खेत का अवशेष मानने के बजाय एक उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा. हालांकि, इस कारोबार से होने वाली वास्तविक कमाई उत्पादन लागत, चारे की गुणवत्ता और बाजार की मांग पर निर्भर करेगी.
धान की पराली का सही प्रबंधन किसानों के सामने बड़ी चुनौती है. ऐसे में स्ट्रॉलेज तकनीक पराली के वैकल्पिक इस्तेमाल का रास्ता खोल सकती है. ICAR के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य कृषि अवशेषों का बेहतर उपयोग, टिकाऊ डेयरी फार्मिंग और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है. इससे पराली जलाने की समस्या कम करने में भी मदद मिल सकती है. हालांकि, तकनीक अभी विकसित की जा रही है. इसलिए बड़े स्तर पर इस्तेमाल से पहले इसकी पोषण गुणवत्ता, सुरक्षा और आर्थिक व्यवहार्यता का मूल्यांकन महत्वपूर्ण होगा.