सिरसा-हिसार में कपास की गुलाबी सुंडी ने बढ़ाई चिंता, कृषि वैज्ञानिकों ने बताई दवा की सही मात्रा – एग्रीवेट

Team Agrivate
5 Min Read

एग्रीवेट: 30 अक्टूबर 2026, सिरसा (हरियाणा): सिरसा-हिसार में कपास की गुलाबी सुंडी ने बढ़ाई चिंता, कृषि वैज्ञानिकों ने बताई दवा की सही मात्रा – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान, नागपुर की 22 से 28 अक्टूबर की ताजा साप्ताहिक एडवाइजरी के मुताबिक हरियाणा के सिरसा और हिसार जिलों में कपास की फसल पर गुलाबी सुंडी का प्रकोप आर्थिक नुकसान के स्तर से ऊपर पहुंच गया है। सिरसा में 170 दिन की फसल में दूसरी तुड़ाई चल रही है, जहां हरे टिंडों में 30 से 45 प्रतिशत तक नुकसान दर्ज किया गया है।

संस्थान ने किसानों को सलाह दी है कि वे प्रति एकड़ कम से कम दो फेरोमोन ट्रैप लगाकर कीट की निगरानी करें। इसके अलावा बीस टिंडों का नमूना लेकर देखें, अगर इनमें से दो या उससे ज्यादा टिंडे क्षतिग्रस्त मिलें तो दवा छिड़काव की जरूरत समझी जाए।

सिरसा के लिए एडवाइजरी में साइपरमेथ्रिन 25 ईसी को 80 से 100 मिलीलीटर प्रति एकड़ या डेल्टामेथ्रिन 2.8 ईसी को 160 से 200 मिलीलीटर प्रति एकड़ की मात्रा में, 150 से 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने को कहा गया है। वैज्ञानिकों ने सुझाया है कि एक ही दवा को लगातार न डालें, बल्कि अलग-अलग दवाएं बदल-बदलकर इस्तेमाल करें। इससे गुलाबी सुंडी के साथ-साथ डस्की कॉटन बग पर भी नियंत्रण में मदद मिलती है।

हिसार जिले के लिए अलग सलाह दी गई है। यहां अगर नुकसान का स्तर पांच प्रतिशत से ऊपर जाए तो इमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी को 100 ग्राम प्रति एकड़ या प्रोफेनोफॉस 50 ईसी को 500 मिलीलीटर प्रति एकड़ की मात्रा में छिड़कने की सलाह है। दस से बारह दिन बाद दूसरा छिड़काव किसी अलग दवा से करने को कहा गया है, ताकि कीट में दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता न बने।

वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि कोई भी दवा सिर्फ फसल की स्थिति, टिंडों में नुकसान की सही गिनती और आर्थिक व्यवहार्यता देखने के बाद ही डाली जाए, ताकि अनावश्यक छिड़काव से बचा जा सके। कपास की दूसरी तुड़ाई के दौर में गुलाबी सुंडी का यह प्रकोप खासतौर पर चिंता का विषय है, क्योंकि इस समय टिंडों में सीधा नुकसान उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर डालता है।

Share This Article