एग्रीवेट: स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बन सकती है. खासकर उन इलाकों में जहां मौसम और जमीन इसके लिए सही हो, वहां किसान इसकी खेती कर सकते हैं. हालांकि, अच्छी पैदावार के लिए सही तकनीक और पौधों की देखभाल जरूरी है.
स्ट्रॉबेरी की खेती में मल्चिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें पौधों के आसपास की जमीन को प्लास्टिक की चादर से ढक दिया जाता है. इससे फल मिट्टी के संपर्क में नहीं आते और उनके गंदे या खराब होने का खतरा कम रहता है. साथ ही खेत में नमी बनी रहती है और बेकार घास भी कम उगती है.
एक एकड़ जमीन में करीब 12 हजार से 20 हजार स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए जा सकते हैं. अच्छी देखभाल करने पर एक पौधे से करीब 200 से 400 ग्राम तक फल मिल सकते हैं. हालांकि, पैदावार पौधों की किस्म, मौसम और देखभाल पर निर्भर करती है.
स्ट्रॉबेरी की खेती में एक एकड़ पर करीब 3 लाख से 3.5 लाख रुपये तक खर्च आ सकता है. अगर फसल अच्छी हुई और बाजार में सही दाम मिले, तो करीब 4 लाख रुपये तक मुनाफा होने की संभावना है. हालांकि, खेती के खर्च, फलों की पैदावार और बाजार का भाव की वजह से मुनाफे पर असर पड़ सकता है.
स्ट्रॉबेरी के फल बहुत नाजुक होते हैं, इसलिए इन्हें तोड़ने के बाद सावधानी से पैक करना जरूरी है. हवादार डिब्बों में पैक करके और ठंडे तापमान में रखकर फलों को खराब होने से बचाया जा सकता है. सही सुविधा मिलने पर किसान अपनी स्ट्रॉबेरी को कोलकाता जैसे बड़े बाजारों में भी बेच सकते हैं.
स्ट्रॉबेरी की खेती करने वाले किसान सरकारी योजनाओं का फायदा भी उठा सकते हैं. टपक सिंचाई लगाने पर कुछ योजनाओं के तहत 90 फीसदी तक सब्सिडी मिल सकती है. इसके लिए किसान अपने जिले के कृषि या उद्यान विभाग से संपर्क कर सकते हैं. सब्सिडी कितनी मिलेगी, यह योजना और किसान की पात्रता पर निर्भर करेगा.