16 साल बाद भी मुआवजे का इंतजार, DFC परियोजना से प्रभावित किसानों ने निकाली रैली – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: गुजरात के आणंद जिले में जमीन के मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने सड़क पर उतरकर जमकर हंगामा और कड़ा विरोध प्रदर्शन किया . वडोदरा-रेवाड़ी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) परियोजना से प्रभावित आणंद और आंकलाव तहसील के किसान सड़कों पर उतर आए. किसानों का आरोप है कि करीब 16 से 18 साल बीत जाने के बाद भी उन्हें जमीन, मकान और फसलों के नुकसान का पूरा मुआवजा नहीं मिला है. अपनी मांगों को लेकर किसानों ने बोरसद चौकड़ी ओवरब्रिज से ढोल-नगाड़ों के साथ रैली निकाली और कलेक्टर कार्यालय पहुंचे. प्रदर्शन के दौरान एक किसान नेता ने कलेक्टर के सामने अपनी पगड़ी उतारकर किसानों की परेशानी जाहिर की.

यह मामला वडोदरा और रेवाड़ी के बीच बन रहे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर रेलवे प्रोजेक्ट से जुड़ा है. किसानों का कहना है कि परियोजना के लिए कई साल पहले उनकी जमीन अधिग्रहित की गई थी. उस समय उन्हें बाजार भाव के अनुसार मुआवजा देने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हुई है. किसानों के मुताबिक, परियोजना का काम शुरू होने के दौरान खेतों की फसलें खराब हुईं और फलदार और दूसरे पेड़ काटे गए. इसके अलावा कई जगह मकान, दुकान और पानी की पाइप लाइन को भी नुकसान पहुंचा.

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारियों ने नुकसान की भरपाई के लिए कई वादे किए थे, लेकिन उन पर अमल नहीं हुआ. किसानों के अनुसार, विधवा महिलाओं को 50 हजार रुपये की एकमुश्त सहायता देने और खेती छिनने से प्रभावित मजदूर किसानों को 750 दिनों का रोजगार देने का भरोसा दिया गया था. इसके साथ ही टूटे हुए बोरवेल और पानी की पाइपलाइन को दोबारा लगाने का खर्च देने की बात भी कही गई थी. किसानों का दावा है कि इन वादों का लाभ उन्हें अब तक नहीं मिला है.

किसानों का कहना है कि रेलवे ट्रैक बनने के बाद खेतों तक आने-जाने के कुछ रास्ते बंद हो गए हैं. इससे उन्हें खेती के काम में परेशानी हो रही है और आपसी विवाद की स्थिति भी बन रही है. प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जमीन का मुआवजा वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर दिया जाए और परियोजना के कारण हुए अन्य नुकसान की भी भरपाई की जाए.

किसानों ने केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय से यह भी मांग की कि जिस परिवार की जमीन परियोजना के लिए ली गई है, उसके एक सदस्य को रेलवे में स्थायी नौकरी दी जाए. उनका कहना है कि जमीन चली जाने से कई परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है, इसलिए उनके लिए रोजगार की व्यवस्था भी जरूरी है. किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई और मुआवजे का उचित समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.

फिलहाल किसान लंबे समय से लंबित मुआवजे और अन्य मांगों को लेकर प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं. किसानों के आरोपों और मुआवजे से जुड़े मामलों पर प्रशासन या रेलवे की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी. (हेताली एम. शाह की रिपोर्ट)

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