रबी फसलों की बुवाई में शुरुआती सुस्ती, पिछले साल के मुकाबले 1.22 लाख हेक्टेयर की कमी, इस बड़े खुलासे से मचा हड़कंप – एग्रीवेट

Team Agrivate
5 Min Read

एग्रीवेट: 23 अक्टूबर 2026, भोपाल: रबी फसलों की बुवाई में शुरुआती सुस्ती, पिछले साल के मुकाबले 1.22 लाख हेक्टेयर की कमी – देश में रबी फसलों की बुवाई की गतिविधियां तेज होने लगी हैं, लेकिन शुरुआती आंकड़ों में पिछले साल की तुलना में बुवाई का क्षेत्र कम दर्ज किया गया है। कृषि विभाग के 16 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में रबी फसलों की बुवाई 3.43 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 4.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई दर्ज की गई थी। इस तरह शुरुआती आंकड़ों में 1.22 लाख हेक्टेयर की कमी सामने आई है।

रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई अभी शुरू नहीं हुई है। वहीं, धान और तिलहन फसलों के रकबे में गिरावट दर्ज की गई है। दूसरी ओर, दलहन और कुछ मोटे अनाजों की बुवाई में मामूली बढ़ोतरी देखी गई है। हालांकि, यह शुरुआती स्थिति है और आने वाले सप्ताहों में बुवाई की रफ्तार से तस्वीर बदल सकती है।

देश में गेहूं का सामान्य रबी क्षेत्र 315.24 लाख हेक्टेयर है। 16 अक्टूबर तक गेहूं की बुवाई शुरू नहीं हुई थी। उत्तर भारत के प्रमुख गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में सामान्यतः अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के दौरान बुवाई की गतिविधियां तेज होती हैं। ऐसे में आगामी दिनों में गेहूं की बुवाई बढ़ने की संभावना रहेगी।

धान की बुवाई के शुरुआती आंकड़े भी पिछले साल की तुलना में कम हैं। 16 अक्टूबर तक रबी धान का रकबा 0.88 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 1.34 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी। इस तरह धान के क्षेत्र में 0.46 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। फिलहाल केरल और तमिलनाडु में रबी धान की बुवाई शुरू हुई है। शुरुआती चरण में धान का रकबा कम रहने से कुल रबी बुवाई क्षेत्र के आंकड़ों पर भी असर पड़ा है।

रबी सीजन में गेहूं, चना, मसूर, सरसों और जौ जैसी फसलें प्रमुख हैं। इनकी बुवाई का समय फसल, क्षेत्र और मौसम की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग होता है। आने वाले दिनों में खेतों में नमी की स्थिति, मौसम और किसानों की तैयारी बुवाई की गति को प्रभावित करेंगे। शुरुआती आंकड़ों में कुल रकबा कम होने के बावजूद अभी पूरे रबी सीजन के रुझान का आकलन करना जल्दबाजी होगी। आगामी कृषि आंकड़ों से स्पष्ट होगा कि बुवाई की गति किस दिशा में बढ़ती है और पिछले वर्ष की तुलना में रकबे का अंतर कितना रहता है।

Share This Article