एग्रीवेट: प्रधानमंत्री Kisan News: हरियाणा में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की अगली किस्त का इंतजार कर रहे किसानों के लिए किसान आईडी का पेच फंस सकता है. राज्य में हजारों किसानों का किसान आईडी बनवाने का काम अभी अधूरा है. ऐसे में किसानों को अगली किस्त मिलने में परेशानी हो सकती है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, एक जिले में पीएम किसान योजना के 82 हजार 200 लाभार्थियों में से अब तक केवल 55 हजार 67 किसानों ने ही किसान आईडी बनवाई है. यानी करीब 27 हजार किसानों का रजिस्ट्रेशन बाकी है. पिछली किस्त के बाद अब किसानों की नजर अगली किस्त पर है, इसलिए समय रहते किसान आईडी और ई-केवाईसी की स्थिति जांच लेना जरूरी है.
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, फतेहाबाद में पीएम किसान योजना के करीब 82,200 लाभार्थियों में से 55,067 किसानों ने ही किसान आईडी बनवाई है. यानी करीब 27 हजार किसानों का रजिस्ट्रेशन अभी बाकी है. यह आंकड़ा दिखाता है कि, किसान आईडी बनवाने का काम समय पर पूरा करना कितना जरूरी है.
सरकार एग्रीस्टैक के तहत किसानों की जमीन और खेती से जुड़ी जानकारी को डिजिटल रूप से एक जगह जोड़ रही है. किसान आईडी इसी व्यवस्था का हिस्सा है. इसके जरिए किसान की पहचान और उसकी जमीन से संबंधित रिकॉर्ड को जोड़ने में मदद मिलती है.
इससे सरकारी विभागों के लिए किसान की जानकारी का सत्यापन करना आसान हो सकता है. आगे चलकर किसान आईडी का इस्तेमाल कृषि से जुड़ी दूसरी योजनाओं और सेवाओं में भी किया जा सकता है. इसलिए किसानों को इसे केवल एक और दस्तावेज समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
हरियाणा के किसान किसान रजिस्ट्री के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी ले सकते हैं. अगर ऑनलाइन प्रक्रिया समझने में परेशानी हो रही है, तो नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर भी मदद ली जा सकती है.
किसान आईडी बनवाने के लिए आधार कार्ड, आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर और जमीन के कागजात अपने पास रखें. इनमें जमाबंदी और जमीन से जुड़े दूसरे राजस्व रिकॉर्ड की जरूरत पड़ सकती है. रजिस्ट्रेशन के दौरान दी गई जानकारी का जमीन के रिकॉर्ड से मिलान किया जाता है. इसलिए आवेदन करते समय नाम, जमीन से जुड़ी जानकारी और अन्य विवरण सही भरें.
किसान आईडी बनवाने के साथ पीएम किसान योजना की ई-केवाईसी, बैंक खाते और आधार से जुड़ी जानकारी की स्थिति भी जांच लें. अगर जमीन के रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी है, तो उसे ठीक कराने के लिए संबंधित विभाग से संपर्क करें.