किसानों के लिए मुश्किल बनीं योजनाएं? प्रधानमंत्री Kisan से जुड़ी शिकायतों में UP-कर्नाटक के आंकड़ों ने चौंकाया – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (प्रधानमंत्री Kisan) समेत अन्य सरकारी योजनाओं को लेकर लाभार्थियों की शिकायतें कई सवाल खड़े करती हैं. कहीं योजना की किस्त अटक जाती है, तो कहीं दस्तावेजों की गड़बड़ी के कारण लोगों को सरकारी लाभ नहीं मिल पाता. प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में दर्ज कुल 1,934 शिकायतों में 5 फीसदी मामले पीएम किसान योजना से जुड़े हैं. वहीं, कर्नाटक में सरकारी योजनाओं से संबंधित शिकायतों की हिस्सेदारी 23 फीसदी और पश्चिम बंगाल में 50 फीसदी रही. ऐसे में पीएम किसान योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता में परेशानी होने पर किसानों के लिए शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया और सही जगह की जानकारी होना जरूरी है.

प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कुल 1,934 शिकायतें दर्ज की गईं. इनमें 5 फीसदी शिकायतें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से संबंधित थीं. इसके अलावा, राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली  से जुड़ी शिकायतों की हिस्सेदारी 9 फीसदी रही. आधार अपडेट से संबंधित मामले 7 फीसदी और आधार नंबर निष्क्रिय होने या खोने से जुड़े मामले 5 फीसदी दर्ज किए गए. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से संबंधित शिकायतों की हिस्सेदारी 4 फीसदी रही. ये आंकड़े बताते हैं कि राज्य में सरकारी सेवाओं और योजनाओं से जुड़े कई तरह के मुद्दे सामने आ रहे हैं. हालांकि, पीएम किसान से संबंधित शिकायतों के वास्तविक कारणों और उनकी कुल संख्या का अलग से विवरण इस तालिका में नहीं दिया गया है.

पश्चिम बंगाल में कुल 913 शिकायतें दर्ज की गईं. इनमें सरकारी योजनाओं  से संबंधित शिकायतों की हिस्सेदारी 50 फीसदी रही. यानी दर्ज शिकायतों में आधे मामले सरकारी योजनाओं से जुड़े थे. इसके अलावा, आधार नंबर निष्क्रिय होने या खोने से संबंधित शिकायतें 6 फीसदी रहीं. ग्राहक सेवा से जुड़े मामलों की हिस्सेदारी 4 फीसदी थी. एलपीजी और एलपीजी एजेंसी से संबंधित शिकायतें भी 4 फीसदी दर्ज की गईं, जबकि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े मामलों की हिस्सेदारी 2 फीसदी रही. इन आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में सरकारी योजनाओं से संबंधित शिकायतें सबसे प्रमुख श्रेणी में शामिल रहीं.

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