एग्रीवेट: देश में प्याज की थोक कीमतों में पिछले एक हफ्ते में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. खरीफ की नई फसल मंडियों में देर से पहुंचने के कारण प्याज की आवक कम हो गई है. व्यापारियों का अनुमान है कि नवंबर में नई फसल की आवक बढ़ने से पहले प्याज की कीमतें 8 से 10 रुपये प्रति किलो तक और बढ़ सकती हैं. हालांकि, महाराष्ट्र की लासलगांव मंडी में सोमवार को प्याज का भाव 4,551 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया. यह शनिवार के मुकाबले करीब 2 रुपये प्रति किलो ज्यादा है.
हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (HEPA) के विकास सिंह ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि पिछले एक हफ्ते में मंडी में प्याज की रोजाना आवक करीब 15 फीसदी घट गई है. उन्होंने कहा कि प्याज की कीमतें बढ़ने की एक बड़ी वजह रबी की पिछली फसल का स्टॉक कम होना और खरीफ की नई फसल का देर से मंडियों में पहुंचना है. नई फसल की आवक में करीब एक महीने की देरी हुई है. इससे बाजार में प्याज की उपलब्धता कम हो गई है. वहीं, क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुषन शर्मा के मुताबिक, जून में सामान्य से करीब 40 फीसदी कम बारिश हुई थी. कम बारिश का असर प्याज की बुवाई और रोपाई पर पड़ा, जिसके कारण खरीफ की फसल तैयार होने और बाजार में पहुंचने में देरी हो रही है. व्यापारियों को उम्मीद है कि नवंबर में नई फसल की आवक बढ़ने पर कीमतों को राहत मिल सकती है.
देश में प्याज की कीमतें फिलहाल ऊंची बनी रह सकती हैं. क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुषन शर्मा के मुताबिक, रबी की फसल का स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है, जबकि खरीफ प्याज की आवक धीमी है. ऐसे में बाजार में प्याज की उपलब्धता कम बनी हुई है, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है. ऐसे देश में प्याज की खेती मुख्य रूप से दो सीजन में होती है. रबी प्याज की बुवाई नवंबर-दिसंबर में होती है और इसकी कटाई मार्च-अप्रैल में की जाती है. देश के कुल प्याज उत्पादन में रबी फसल की हिस्सेदारी करीब दो-तिहाई है. इस फसल को स्टोर करके रखा जाता है, ताकि सितंबर या अक्टूबर की शुरुआत तक बाजार में प्याज की आपूर्ति बनी रहे. इसके बाद आमतौर पर खरीफ प्याज की आवक शुरू हो जाती है. हालांकि, इस साल खरीफ प्याज की आवक में देरी हो रही है. पुषन शर्मा के मुताबिक, आमतौर पर सितंबर के आखिर या अक्टूबर की शुरुआत में आने वाली नई फसल की आवक अब अक्टूबर के आखिरी दिनों में बढ़ने की उम्मीद है.
देश में आने वाले दिनों में प्याज की आवक बढ़ने से कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है. हालांकि, दशहरा और दिवाली के दौरान मांग बढ़ने से फिलहाल दाम ऊंचे बने रहने की आशंका है. क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुषन शर्मा के मुताबिक, नई फसल की आवक बढ़ने से कीमतों में नरमी आ सकती है, लेकिन त्योहारों की मांग इस राहत को सीमित कर सकती है.