भारत का कृषि उत्पादन 10 साल में 49% बढ़ा, अब दुनिया का फूड बास्केट बनने का लक्ष्य: शिवराज सिंह चौहान – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 16 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: भारत का कृषि उत्पादन 10 साल में 49% बढ़ा, अब दुनिया का फूड बास्केट बनने का लक्ष्य: शिवराज सिंह चौहान – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत अब केवल अपनी खाद्य जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में पूरी दुनिया का ‘फूड बास्केट’ बनकर उभरेगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से 2024 के बीच देश का कुल कृषि उत्पादन 49 प्रतिशत बढ़ा है। इसके साथ ही उन्होंने बिना मानकों के खुल रहे निजी कृषि कॉलेजों और फर्जी डिग्रियों पर सख्ती से रोक लगाने की बात कही। इसके लिए जल्द ही एग्रीकल्चर काउंसिल का गठन किया जाएगा।

शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को दिल्ली के पूसा में एग्रीविजन के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि भारतीय किसानों के परिश्रम और आधुनिक कृषि नीतियों के कारण देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बना है। अब जरूरत कृषि उपज के वैज्ञानिक भंडारण, बेहतर प्रबंधन और वैश्विक बाजारों में निर्यात बढ़ाने पर ध्यान देने की है।

केंद्रीय मंत्री ने देश की कृषि यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय भारत को पीएल-480 कार्यक्रम के तहत विदेशों से अनाज आयात करना पड़ता था। आज भारतीय किसानों की मेहनत और आधुनिक नीतियों के दम पर देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर है। उन्होंने बताया कि भारत चावल के उत्पादन और निर्यात में दुनिया में पहले स्थान पर है, जबकि गेहूं उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। अब देश के सामने चुनौती केवल अधिक उत्पादन करने की नहीं, बल्कि कृषि उपज का वैज्ञानिक तरीके से भंडारण करने, उसका बेहतर प्रबंधन करने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात बढ़ाने की है।

फर्जी कृषि डिग्रियों पर लगेगी रोक, बनेगी एग्रीकल्चर काउंसिल

शिवराज सिंह चौहान ने कृषि शिक्षा में गुणवत्ता बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि बिना निर्धारित मानकों के खुल रहे निजी कृषि कॉलेजों और फर्जी डिग्रियां बांटने वाले संस्थानों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके नियमन के लिए जल्द एग्रीकल्चर काउंसिल का गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को बीएससी एग्रीकल्चर और एमएससी एग्रीकल्चर जैसी तकनीकी डिग्रियां हासिल करने के लिए समय और पैसा खर्च करना पड़ता है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उनकी डिग्रियों का उचित महत्व हो और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। केवल फीस लेकर डिग्री बांटने वाले संस्थानों को इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी।

केंद्रीय मंत्री ने कृषि नीति बनाने में विद्यार्थियों, विशेषज्ञों और किसान संगठनों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने अधिवेशन में शामिल लोगों से कृषि क्षेत्र की समस्याओं और उनके समाधान पर गंभीरता से विचार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “आप इस राष्ट्रीय अधिवेशन में गहन मंथन कीजिए और निष्कर्ष रूपी अमृत निकालिए, उसे देशहित में बांटने और लागू करने का काम सरकार करेगी।”

उन्होंने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अधिवेशन में सामने आने वाले सुझावों और निष्कर्षों पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के लिए अगले 15 दिनों से एक महीने के भीतर प्रतिनिधियों के साथ दोबारा बैठक की जाएगी। इसमें कम समय और लंबे समय में लागू की जाने वाली योजनाओं पर काम किया जाएगा।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत में औसत कृषि जोत का आकार केवल 0.96 हेक्टेयर है। ऐसे में छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती में विविधीकरण जरूरी है। किसानों को केवल अनाज की खेती तक सीमित रहने के बजाय अन्य गतिविधियों को भी अपनाना चाहिए। उन्होंने एकीकृत खेती (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) को बढ़ावा देने पर जोर दिया। इसके तहत अनाज की खेती के साथ फल, सब्जियां, औषधीय पौधों की खेती, पशुपालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन और प्राकृतिक खेती को जोड़ा जा सकता है। इससे किसानों की आय के अलग-अलग स्रोत विकसित होंगे और उनकी आजीविका को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकेगा।

केंद्रीय मंत्री ने कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ाने की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों को खेती से जोड़ने की दिशा में तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं। इन तकनीकों के उपयोग से कृषि कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने और किसानों की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने एग्रीविजन के 10 वर्षों के सफर पर आधारित विशेष पुस्तिका का विमोचन भी किया। राष्ट्रीय अधिवेशन में देशभर से आए कृषि वैज्ञानिक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में शामिल हुए।

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