रबी सीजन 2026-27 के लिए देश का खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य तय, मौसम की मार से इस बार लक्ष्य में कटौती – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 16 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: रबी सीजन 2026-27 के लिए देश का खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य तय, मौसम की मार से इस बार लक्ष्य में कटौती –  केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य 37.393 करोड़ टन (373.93 मिलियन टन) तय किया है। इसमें से अकेले रबी सीजन से 17.772 करोड़ टन (177.72 मिलियन टन) उत्पादन की उम्मीद रखी गई है। यह लक्ष्य नई दिल्ली में हुए राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तय किया।

खास बात यह है कि यह लक्ष्य पिछले साल के मुकाबले कम रखा गया है। वर्ष 2025-26 में देश ने अब तक का सबसे ज्यादा 37.656 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन हासिल किया था। नए सीजन के लक्ष्य में करीब 26 लाख टन की कमी, मौसम को लेकर जताई जा रही आशंकाओं का नतीजा है।

सम्मेलन में बताया गया कि इस साल बारिश में कमी देखी गई, जो शुरुआत में करीब 14 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। बाद में कुछ दिन अच्छी बारिश होने से यह कमी घटकर करीब 12 प्रतिशत रह गई। इसके पीछे एल-नीनो के असर को एक बड़ी वजह बताया गया है।

सरकार ने कहा कि अप्रैल महीने से ही एल-नीनो के असर से निपटने के लिए कदम उठाए जाने लगे थे। किसानों से सलाह दी गई है कि जिन इलाकों में बारिश कम हुई है, वहां पानी ज्यादा खपत करने वाली फसलों के बजाय दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा दिया जाए।

बुवाई के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल बुवाई रकबे में एक फीसदी की गिरावट आई है, हालांकि यह सामान्य स्तर के करीब ही है। धान के रकबे में सबसे ज्यादा कमी दर्ज हुई, वहीं मक्का, सोयाबीन और कपास के रकबे में भी मामूली गिरावट रही। इसके उलट दलहन, तिलहन और मोटे अनाज जैसे उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी और तुअर के रकबे में बढ़ोतरी हुई है।

रबी सीजन के लिए उर्वरक जरूरत का अनुमान 380 लाख मीट्रिक टन (यूरिया और डीएपी समेत) रखा गया है। सम्मेलन में बताया गया कि इस बार उर्वरक का शुरुआती स्टॉक बढ़कर 163 लाख मीट्रिक टन हो गया है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 122 लाख मीट्रिक टन था।

सम्मेलन में यह भी कहा गया कि लक्ष्य तय करते समय हर राज्य में पानी की उपलब्धता, मिट्टी की नमी और वहां की फसल चक्र से जुड़ी स्थिति को ध्यान में रखा गया है। राज्यों से सलाह-मशविरा करने के बाद ही यह आंकड़े तय किए गए हैं।

गौरतलब है कि बीते कुछ वर्षों से गेहूं और चावल का उत्पादन दुनिया के मुकाबले काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है, इसलिए अब सरकार का जोर दलहन और तिलहन की पैदावार बढ़ाने पर है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके।

रबी लक्ष्य तय करने से पहले सम्मेलन में इसी साल की खरीफ बुवाई के आंकड़ों की भी समीक्षा की गई। 18 सितंबर 2026 तक देशभर में कुल खरीफ बुवाई रकबा 11.039 करोड़ हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 15 लाख हेक्टेयर कम है।

इसमें सबसे ज्यादा गिरावट धान के रकबे में दर्ज की गई, जो पिछले साल के मुकाबले 3.7 प्रतिशत घटकर 4.29 करोड़ हेक्टेयर रह गया। इसके अलावा मक्का, सोयाबीन और कपास के रकबे में भी मामूली कमी आई है।

हालांकि दलहन की बुवाई में इस बार बढ़ोतरी देखी गई। दलहन का रकबा पिछले साल से 1.4 प्रतिशत बढ़कर 1.19 करोड़ हेक्टेयर पहुंच गया। सम्मेलन में बताया गया कि तिलहन और मोटे अनाज के रकबे में भी इजाफा हुआ है, जिसमें उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी और तुअर जैसी फसलें शामिल हैं।

कृषि मंत्रालय का कहना है कि यह बदलाव सरकार की उस कोशिश का नतीजा है, जिसके तहत कम बारिश वाले इलाकों के किसानों को पानी की ज्यादा जरूरत वाली फसलों की जगह दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। आने वाले रबी सीजन में भी राज्यों को इसी तर्ज पर फसल चक्र में बदलाव की सलाह दी गई है, ताकि पानी की कमी वाले इलाकों में भी किसानों को नुकसान न उठाना पड़े।

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