एग्रीवेट: Karnataka Drought: महाराष्ट्र के बाद अब कर्नाटक के किसानों की चिंता भी बढ़ती ही जा रही है. राज्य सरकार ने बुधवार को 9 और तालुकों को सूखा प्रभावित की लिस्ट में शामिल कक दिया है. इसके बाद अब राज्य के कुल 240 में से 226 तालुकों में सूखे जैसे हालात हो गए हैं. यह राज्य में अब तक सूखे से प्रभावित तालुकों की सबसे बड़ी संख्या बताई जा रही है. कम बारिश और जलाशयों में घटते पानी के कारण खेती-किसानी पर संकट गहराता जा रहा है. राज्य सरकार अब सूखे से हुए नुकसान का पूरा ब्योरा तैयार कर रही है, ताकि केंद्र सरकार से राहत राशि मांगी जा सके.
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने के अनुसार, नौ तालुकों में नुकसान का मौके पर जाकर आकलन पूरा कर लिया गया है. इसके बाद इन्हें भी सूखा प्रभावित सूची में शामिल किया गया. बाकी तालुकों में भी हालात की जांच की जा रही है. अगर वहां भी सूखे के तय मानकों के मुताबिक नुकसान पाया जाता है, तो उन्हें भी इस सूची में शामिल किया जा सकता है.
राज्य सरकार के मुताबिक, सूखे से हुए नुकसान की अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा रही है. इसे करीब एक सप्ताह में पूरा करने की उम्मीद है. रिपोर्ट तैयार होने के बाद मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और दूसरे अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल राहत की मांग लेकर दिल्ली जा सकता है.
कर्नाटक में जून से सितंबर के बीच कुल 545.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस दौरान सामान्य बारिश 852 मिलीमीटर होनी चाहिए थी. यानी राज्य में सामान्य से काफी कम बारिश हुई. बारिश की कमी का सीधा असर खेती और पानी की उपलब्धता पर पड़ रहा है. कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 14 प्रमुख जलाशयों की कुल क्षमता 895 टीएमसी फीट है. फिलहाल इनमें करीब 553 टीएमसी फीट पानी उपलब्ध है. पिछले साल इसी समय इन जलाशयों में लगभग 827 टीएमसी फीट पानी था. इससे पता चलता है कि इस बार जलाशयों में पानी का स्तर काफी कम है.
कर्नाटक में इससे पहले साल 2023 में 223 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया था. इससे पहले 2016 में 136, 2017 में 139 और 2019 में 100 तालुक सूखे की चपेट में आए थे. पिछले पांच साल में राज्य में सूखे की ऐसी स्थिति नहीं बनी थी. इस बार 226 तालुकों तक सूखे का फैलना चिंता बढ़ाने वाला है.
उपमुख्यमंत्री के मुताबिक, इस साल राज्य के लगभग सभी हिस्सों में नुकसान हुआ है. सरकार ने पिछले साल सूखा राहत के लिए केंद्र से करीब 18,000 करोड़ रुपये मांगे थे. इस बार नुकसान का दायरा बढ़ने के कारण राहत राशि की मांग भी इससे ज्यादा हो सकती है. राज्य सरकार ने केंद्र से सूखा राहत के नियमों में छूट देने की मांग भी की है.
कम बारिश और जलाशयों में पानी घटने का असर किसानों की खेती और कमाई पर पड़ सकता है. आने वाले दिनों में किसानों को इन मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है: