एग्रीवेट: प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (पीएमडीडीकेवाई) ने 11 अक्टूबर 2026 को अपना एक साल पूरा कर लिया है. इस योजना का मकसद देश के 100 ऐसे जिलों में खेती को बेहतर बनाना है, जहां फसलों की पैदावार कम है, साल में कम बार फसल उगाई जाती है और किसानों को खेती के लिए पर्याप्त कर्ज नहीं मिल पाता. योजना के जरिए इन जिलों में कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है. इस योजना के तहत 11 मंत्रालयों और विभागों की 36 केंद्रीय योजनाओं को एक साथ जोड़कर लागू किया जा रहा है. इसमें राज्य सरकारों की योजनाओं और निजी क्षेत्र की भागीदारी भी शामिल है.
योजना के तहत चुने गए 100 जिलों का छह प्रमुख उद्देश्यों पर आधारित औसत स्कोर अप्रैल 2026 में 18.85 था, जो अगस्त 2026 में बढ़कर 46.89 हो गया. यानी इस दौरान स्कोर में 28.04 अंकों का सुधार दर्ज किया गया. खास बात यह है कि इन छह उद्देश्यों में फसल की पैदावार बढ़ाना, खेती में अलग-अलग फसलों को बढ़ावा देना, टिकाऊ खेती अपनाना, फसल कटाई के बाद भंडारण की सुविधा बढ़ाना, सिंचाई व्यवस्था सुधारना और किसानों को कृषि कर्ज आसानी से उपलब्ध कराना शामिल है. इसके अलावा, सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ किसानों तक बेहतर तरीके से पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है.
भारत को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू किए गए मिशन का भी एक साल पूरा हो गया है. 11 अक्टूबर 2025 को शुरू हुए इस मिशन पर वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक छह साल में 11,440 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसका उद्देश्य देश में दलहन का उत्पादन बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, देश में दलहन का उत्पादन 2024-25 में 256.83 लाख टन था, जो 2025-26 में बढ़कर 274.09 लाख टन हो गया. मिशन के तहत 2030-31 तक उत्पादन बढ़ाकर करीब 350 लाख टन करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही प्रति हेक्टेयर उपज 1,130 किलोग्राम तक पहुंचाने और दलहन की खेती का रकबा बढ़ाकर 310 लाख हेक्टेयर करने की योजना है.
मिशन के तहत छह साल में किसानों को 87.5 लाख मुफ्त बीज किट वितरित करने का लक्ष्य है. इससे दलहन की खेती को बढ़ावा देने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है. हालांकि, केंद्र सरकार जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरे देश से दलहन का आयात कर रही है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दलहन का आयात बिल 2024-25 के 46,427.60 करोड़ रुपये से घटकर 2025-26 में 31,793.59 करोड़ रुपये रह गया. इसमें 31.52 फीसदी की कमी दर्ज की गई. वहीं, दलहन का निर्यात 13.40 फीसदी बढ़कर 2025-26 में 969.53 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया.