गन्ना किसानों की चेतावनी, मांगें नहीं मानी गईं तो 13 अक्टूबर से चक्का जाम.. जानें क्यों हैं नाराज – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: कर्नाटक में गन्ना किसानों ने बेहतर दाम और समय पर भुगतान की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है. कर्नाटक राज्य रैयत संघ और ग्रीन ब्रिगेड ने कहा है कि 12 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ बैठक होने वाली है. अगर बैठक में मांगें नहीं मानी गईं, तो 13 अक्टूबर से राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर राष्ट्रीय राजमार्गों को अनिश्चितकाल के लिए जाम किया जाएगा.

संगठन के राज्य कार्यकारी अध्यक्ष महेशगौड़ा सुबेदार ने कलबुर्गी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि बैठक में किसानों की मांगों पर संतोषजनक फैसला नहीं होने पर गन्ना किसान अपना आंदोलन और तेज करेंगे. कर्नाटक में किसान संगठन  ने 9.25 फीसदी रिकवरी दर पर गन्ने का भाव 5,500 रुपये प्रति टन तय करने की मांग की है. संगठन का कहना है कि गन्ने की कटाई के 14 दिन के भीतर किसानों को भुगतान किया जाना चाहिए. अगर भुगतान में देरी होती है, तो बकाया राशि पर 15 फीसदी ब्याज भी दिया जाए.

महेशगौड़ा सुबेदार ने कहा कि गन्ने की कटाई और उसे चीनी मिल तक पहुंचाने का खर्च किसानों के बजाय मिलों को उठाना चाहिए. उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कटाई करने वाले मजदूर किसानों से 8,000 से 10,000 रुपये अतिरिक्त वसूल रहे हैं. सुबेदार ने कहा कि अगर यह सिलसिला जारी रहता है, तो मजदूरों का यह खर्च भी चीनी मिलों को उठाना चाहिए.

गन्ने की तौल में गड़बड़ी रोकने के लिए किसान संगठन ने सभी कृषि उपज मंडी समितियों (APMC) में डिजिटल तौल मशीनें लगाने की मांग की है. संगठन का कहना है कि इससे गन्ने का सही वजन सुनिश्चित किया जा सकेगा और किसानों को नुकसान नहीं होगा. किसान संगठन ने यह भी मांग की है कि गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) तय करते समय चीनी की कीमत के साथ-साथ चीनी मिलों की दूसरी कमाई को भी ध्यान में रखा जाए. संगठन के राज्य कार्यकारी अध्यक्ष महेशगौड़ा सुबेदार ने कहा कि चीनी मिलों को इथेनॉल, शीरा, खोई और बिजली बेचने से भी कमाई होती है. इसलिए गन्ने का दाम तय करते समय इनसे होने वाली कमाई को भी शामिल किया जाना चाहिए.

इसके अलावा, संगठन ने कर्नाटक में गन्ने के लिए राज्य परामर्श मूल्य (SAP) लागू करने की मांग की है. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की तरह कर्नाटक में भी किसानों को गन्ने के तय मूल्य के अलावा अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था होनी चाहिए. किसान संगठन ने कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) से राज्य के कृषि और बागवानी विभागों के साथ मिलकर फसलों की खेती की वास्तविक लागत का आकलन करने की मांग की है. संगठन का कहना है कि खेती की लागत तय करते समय जमीन का किराया और सिंचाई के लिए लिए गए कर्ज पर लगने वाले ब्याज को भी शामिल किया जाना चाहिए. इससे फसलों के उचित दाम तय करने में मदद मिलेगी और किसानों की लागत की भरपाई हो सकेगी.

महेशगौड़ा सुबेदार ने कहा कि 12 अक्टूबर को नई दिल्ली के कृषि भवन में होने वाली बैठक में गन्ना किसानों की मांगों पर ठोस फैसला होना चाहिए. अगर बैठक में उनकी मांगों का संतोषजनक समाधान नहीं निकला, तो संगठन और किसान 13 अक्टूबर से कर्नाटक के सभी जिला मुख्यालयों पर राष्ट्रीय राजमार्गों को अनिश्चितकाल के लिए जाम करेंगे.

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