एग्रीवेट: 05 नवंबर 2026, जयपुर: राजस्थान: खाद की सब्सिडी की चोरी पर 7 साल तक की जेल, लापरवाह अधिकारियों की भी तय होगी जवाबदेही – राजस्थान में किसानों के लिए मिलने वाली खाद की सब्सिडी का दुरुपयोग और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि सब्सिडी वाली खाद को अवैध तरीके से बेचने, भंडारण करने या औद्योगिक उपयोग में लगाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत दोषी पाए जाने पर 3 महीने से लेकर 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाएगी।
कृषि विभाग के अनुसार, केंद्र सरकार किसानों को रियायती दरों पर खाद उपलब्ध कराने के लिए भारी सब्सिडी देती है। यूरिया के एक बैग पर करीब 2,700 रुपये और डीएपी के एक बैग पर लगभग 3,500 रुपये की सब्सिडी दी जाती है। इस सब्सिडी का लाभ किसानों तक पहुंचाने के बजाय खाद की कालाबाजारी, अवैध भंडारण और दूसरे कामों में इस्तेमाल करना नियमों का उल्लंघन है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सब्सिडी वाली खाद की अवैध बिक्री, परिवहन और भंडारण में शामिल लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अवैध परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों को भी जब्त किया जा सकता है।
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खाद की कालाबाजारी और सब्सिडी के दुरुपयोग पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई की जाएगी। अधिनियम की धारा 7 में दोषी पाए जाने पर 3 महीने से लेकर 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, धारा 10 के तहत कंपनियों के साथ-साथ जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है।
जिन औद्योगिक इकाइयों में यूरिया का इस्तेमाल होता है, उन्हें हर महीने गैर-सब्सिडी वाले यूरिया की खरीद और उत्पादन से जुड़ी जानकारी देनी होगी। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि औद्योगिक उपयोग के लिए खरीदे गए यूरिया का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के अनुसार हो रहा है या नहीं।
कृषि विभाग ने खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराने की बात कही है। रबी सीजन के दौरान किसानों को खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, खाद की कालाबाजारी और अवैध गतिविधियों की जानकारी देने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए नकद पुरस्कार देने की योजना भी रखी गई है। सरकार का उद्देश्य है कि किसानों के लिए दी जाने वाली सब्सिडी का लाभ उन्हीं तक पहुंचे और रबी सीजन में खाद की उपलब्धता प्रभावित न हो।