श्योपुर में पराली प्रबंधन एवं रोकथाम के संबंध में बैठक आयोजित – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 04 नवंबर 2026, श्योपुर: श्योपुर में पराली प्रबंधन एवं रोकथाम के संबंध में बैठक आयोजित –कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा ने कहा कि धान की फसल कटाई पश्चात् पराली में आग न लगाएं, क्योंकि इससे पर्यावरण प्रदूषण के साथ-साथ भूमि की उर्वरता एवं उत्पादकता में कमी होती है। किसान भाई कुछ उपयोगी कृषि यंत्र जैसे बेलर, रीपर कम बाइंडर, स्ट्रॉ रीपर, सुपर सीडर एवं जीरो टिलेज, सीड ड्रिल के उपयोग से पराली का प्रबंधन कर सकते है। उन्होंने कहा कि जिले में धान के बढते रकबे को दृष्टिगत रखते हुए यह आवश्यक है कि पराली का उचित प्रबंध किया जाए जिससे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। इसके साथ ही उन्होंने पराली प्रबंधन के तहत गठित ग्राम स्तरीय निगरानी समितियों की सक्रियता बढाये जाने के निर्देश भी दिये। वे आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में पराली प्रबंधन एवं रोकथाम के संबंध में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहीं थी।

बैठक के दौरान सीईओ जिला पंचायत श्री कार्तिकेय जायसवाल, अपर कलेक्टर श्री रूपेश उपाध्याय, डिप्टी कलेक्टर श्री बीएस श्रीवास्तव एवं श्री शिवलाल शाक्य, एसडीओपी श्री  आनंद  कुमार राय, उप संचालक कृषि श्री आरके सिंह, भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष श्री नरेन्द्र चौधरी, कृषि वैज्ञानिक डॉ कायम सिंह, उप संचालक पशुपालन डॉ सुभाष बाबू दौहरे, सहायक कृषि यंत्री श्री नवीन कुमार सहित एसएडीओ एवं श्योपुर तथा कराहल क्षेत्र के आरएईओ एवं तहसीलदार उपस्थित थे।

कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा ने कहा कि विगत एक माह से गांव-गांव में पराली प्रबंधन के लिए जागरूकता शिविर आयोजित किये जा रहे है, इसके साथ ही अन्य माध्यमों से भी किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग फील्ड में निगरानी बढाये तथा ग्राम स्तरीय निगरानी समितियों को और अधिक सक्रिय किया जायें। उन्होंने निर्देश दिये कि सभी आरएईओ एवं एसएडीओ निरंतर रूप से फील्ड में भ्रमण करेंगे तथा पराली जलाने की घटनाओं पर कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बगैर एसएमएस कटर के हार्वेस्टर का संचालन करने वाले हार्वेस्टर के मालिकों और संचालको पर कठोर कार्यवाही की जायें। उन्होंने पुलिस एवं आरटीओ विभाग के अधिकारियों को भी निर्देशित किया कि नाको पर कड़ी निगरानी रखी जाए तथा बाहर से आने वाले हार्वेस्टरों में एसएमएस कटर मशीन का सत्यापन सुनिश्चित किया जायें। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जिले में पंजीकृत हार्वेस्टर, कम्बाईन मशीनों में अनिवार्य रूप से एसएमएस लगाया जाए, इसके लिए आरएईओ को उनके क्षेत्र अनुसार सूची भी प्रदान की गई है। उन्होंने तहसीलदारों एवं नायब तहसीलदारों को भी निर्देश दिये कि कोटवारो के माध्यम से सुनिश्चित किया जाए कि हार्वेस्टर मशीन में एसएमएस का उपयोग हो रहा है अथवा नहीं, यदि उपयोग नहीं हो रहा है तो प्रतिबंधात्मक आदेश के तहत कार्यवाही सुनिश्चित की जायें। ग्राम स्तरीय निगरानी समितियों के माध्यम से पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखी जाए तथा वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जायें।

15 आरएईओ का 15-15 दिवस का वेतन काटने के निर्देश – कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा द्वारा बैठक में उपस्थित आरएईओ से उनके क्षेत्रवार पराली प्रबंधन पर चर्चा की गई तथा क्षेत्र में उपलब्ध हार्वेस्टरों के संचालन की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान पराली प्रबंधन के प्रयासों में कमी तथा लापरवाही पाए जाने पर 15 आरएईओ के 15-15 दिवस का वेतन काटने के निर्देश उप संचालक कृषि को दिये। कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा ने कहा कि पराली प्रबंधन के प्रयासों में कमी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, इसलिए सभी फील्ड अमला सतत रूप से फील्ड में रहकर निगरानी करेंगे तथा पराली जलाने की घटनाओं और बगैर एसएमएस के हार्वेस्टर संचालन की जानकारी तत्काल जिला स्तर पर उपलब्ध करायेंगे।

पराली जलाने पर जुर्माने का प्रावधान – पराली जलाने के मामले में पर्यावरण विभाग के नोटिफिकेशन द्वारा कृषकों पर अर्थदण्ड अधिरोपित करने का प्रावधान किया गया है। जिसके अनुसार 2 एकड़ से कम रकबे पर 2500 रुपये, 2 से 5 एकड़ तक रकबे में पराली जलाने पर 5 हजार रुपये तथा 5 एकड़ से अधिक पर 15 हजार रुपये अर्थदंड का प्रावधान है। यदि कोई भी किसान अपने खेत की पराली में आग लगाते है तो उक्त निर्देशों के अनुरूप दण्ड अधिरोपण की कार्यवाही की जायेगी।

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