एग्रीवेट: मध्य प्रदेश में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) यानी एम-पैक्स से जुड़े ऋणों में अनियमितताओं के कारण प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए ‘कवच योजना’ शुरू कर दी गई है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे किसानों को राहत दिलाना है, जिनके नाम पर ऋण है, लेकिन ऋण वितरण या उसके लेनदेन में गड़बड़ी के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और किसानों को डिफॉल्टर दिखा दिया गया है.
मध्यप्रदेश के सहकारिता विभाग की ओर से ऋण संबंधी अनियमितताओं से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए एम-पैक्स ‘कवच योजना’ के तहत 29 जिलों में 95 पैक्स समितियों को शामिल किया गया है. इन समितियों से कर्ज लेने वाले किसानों को खातों में गड़बड़ियों से किसानों को डिफॉल्टर श्रेणी में डाल दिया गया है. ऐसे में किसानों को खाद, बीज समेत अन्य कृषि संबंधी वित्तीय जरूरतों पर रोक लगी हुई है. इससे राहत देने के लिए राज्य सरकार ने एम-पैक्स कवच योजना को लागू कर दिया है.
देश में 11 करोड़ ‘किसान पहचान पत्र’ बनकर तैयार, तय समय सीमा से 5 महीने पहले हासिल किया लक्ष्य – एग्रीवेट
एम-पैक्स ‘कवच योजना के तहत किसानों के ऋण खातों में हुई गड़बड़ियों को दूर कर उन्हें सहकारी ऋण व्यवस्था से दोबारा जोड़ने और खाद, बीज और फसल ऋण की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान है. योजना में तीन प्रकार की ऋण अनियमितताओं को शामिल किया गया है. इनमें किसान द्वारा ऋण नहीं लेने के बावजूद खाते में ऋण दर्ज करना, जमा राशि की वैध रसीद होने के बाद भी खाते में जमा नहीं दर्शाना और वास्तविक ऋण से अधिक बकाया राशि दर्ज करना शामिल है.
सहकारिता विभाग ने शुरुआती चरण में 4,953 किसानों को लाभ देने का टारगेट रखा है. इसके लिए 50 करोड़ रुपये की राहत निधि का प्रावधान किया गया है. इन किसानों के ऋण खातों को जांचने पर अनियमितता प्रमाणित होने की स्थिति में किसान का ऋण खाता नियमानुसार दुरुस्त किया जाएगा. विवादित अथवा फर्जी ऋण राशि पर ब्याज रोका जाएगा. जांच लंबित रहने के दौरान भी आगामी फसल सीजन के लिए शून्य फीसदी ब्याज पर फसल ऋण और खाद-बीज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी.
जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति के जरिए प्रकरण का निपटारा 30 दिनों के भीतर किया जाएगा. प्रभावित किसान को संबंधित पैक्स समिति में लिखित शिकायत एवं आवेदन देना होगा. अनियमितता के लिए दोषी पाए गए अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार एफआईआर तथा धारा 64/58-बी के अंतर्गत वसूली संबंधी कार्रवाई की जाएगी. वसूली से प्राप्त राशि राहत निधि में जमा की जाएगी. र्धारित प्रक्रिया के अनुसार किसान से शपथ-पत्र भी लिया जाएगा. किसानों से अपील है कि ऋण खाते में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित पैक्स समिति में लिखित शिकायत प्रस्तुत करें. साथ ही ऋण खाते की पासबुक, जमा रसीद एवं अन्य संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखें.
किसानों के लिए यह समझना जरूरी है कि ‘कवच योजना’ को सभी किसानों की कर्जमाफी योजना नहीं माना जाना चाहिए. इसका दायरा उन किसानों पर केंद्रित है, जिनके सहकारी ऋण खातों में गड़बड़ियों की जांच लंबित होने के कारण वे डिफॉल्टर की श्रेणी में आ गए हैं. योजना से पात्र किसानों को नया फसल ऋण लेने और सरकारी योजनाओं का लाभ पाने का रास्ता मिल सकता है.