एग्रीवेट: चक्रवाती तूफान मुरासु के संभावित खतरे को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) ने राहत और बचाव अभियान की तैयारियां तेज कर दी हैं. तमिलनाडु के रानीपेट जिले में अरक्कोनम के पास नागरीकुप्पम स्थित NDRF की चौथी बटालियन से तीन टीमें आंध्र प्रदेश भेजी गई हैं. ये टीमें तूफान के तट से टकराने के बाद प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगी.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, चक्रवाती तूफान मुरासु पश्चिम-मध्य और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर गंभीर चक्रवाती तूफान में तब्दील हो चुका है. 2 नवंबर को सुबह 2:30 बजे जारी मौसम बुलेटिन के मुताबिक, तूफान पिछले छह घंटों के दौरान 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा.
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इस समय तूफान का केंद्र 13.6 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 82.5 डिग्री पूर्वी देशांतर के आसपास था. यह चेन्नई से करीब 260 किलोमीटर पूर्व-उत्तरपूर्व, नेल्लोर से 290 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व और विशाखापट्टनम से लगभग 470 किलोमीटर दक्षिण में स्थित था.
IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, मुरासु के उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में पार करने की आशंका है. इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है, जबकि झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है.
चक्रवात और भारी बारिश के संभावित प्रभाव को देखते हुए ओडिशा के रायगढ़ा जिला प्रशासन ने भी एहतियाती कदम उठाए हैं. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (सामान्य) रवींद्रनाथ कहनरा के मुताबिक, जिले के सभी 11 फायर स्टेशन की टीमों को तैनात कर दिया गया है. इसके अलावा, आपात स्थिति में सड़कों से मलबा हटाने के लिए भारी मशीनरी को संवेदनशील स्थानों पर रखा गया है.
रविवार को जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में वर्चुअल आपातकालीन समीक्षा बैठक हुई. इसमें मौसम की शुरुआती चेतावनी, आपातकालीन सेवाओं, राहत एवं बचाव अभियान, सुरक्षित आश्रय स्थलों और जरूरी उपकरणों की उपलब्धता की समीक्षा की गई.
रवींद्रनाथ कहनरा ने बताया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और विशेष राहत आयुक्त (SRC) की रिपोर्ट के आधार पर जिले में 2 नवंबर तक येलो अलर्ट और 3 और 4 नवंबर के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है.
उन्होंने कहा कि प्रशासन ने सभी 11 फायर स्टेशन की टीमों के साथ जेसीबी, एक्सकेवेटर और हाइड्रा क्रेन को गुम्मा घाटी और मुकुंदपुर घाटी में तैनात किया है. इनका इस्तेमाल राष्ट्रीय राजमार्ग-326 पर पेड़ गिरने या मलबा आने से रास्ता बंद होने की स्थिति में तत्काल सफाई के लिए किया जाएगा.
अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि ब्लॉक विकास अधिकारियों (BDO), तहसीलदारों और संबंधित अधिकारियों को सभी जरूरी उपकरणों और मशीनों के साथ अपने क्षेत्रों में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके. Copyright