एग्रीवेट: KCC Loan: खेती के लिए समय पर पैसा मिलना किसानों के लिए बेहद जरूरी होता है. बीज, खाद, कीटनाशक और दूसरी जरूरतों के लिए कई बार किसानों को कर्ज लेना पड़ता है. पहले किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के लिए आवेदन करने में काफी कागजी काम होता था और किसानों को बैंक के चक्कर भी लगाने पड़ते थे. अब डिजिटल तकनीक की मदद से इस प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की जा रही है. इसी दिशा में ई-किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल किसानों को घर बैठे कृषि लोन के लिए आवेदन करने की सुविधा दे रहा है. इस पोर्टल पर आवेदन के साथ किसान अपनी लोन पात्रता और खेती से जुड़ी दूसरी जरूरी जानकारी भी देख सकते हैं. आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 से अब तक 3 लाख से ज्यादा KCC आवेदन डिजिटल माध्यम से दर्ज किए जा चुके हैं.
ई-किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल के जरिए किसान की पहचान और खेती से जुड़ी जानकारी को डिजिटल तरीके से जांचने की व्यवस्था है. इसमें आधार का प्रमाणीकरण, जमीन के रिकॉर्ड का सत्यापन और किसान के पास कितनी जमीन है, इसकी जानकारी शामिल है. फसल और खेती के रकबे को ध्यान में रखकर किसान के लिए उपलब्ध लोन सीमा तय करने में भी यह डिजिटल व्यवस्था मदद करती है. इससे आवेदन की जांच और आगे की प्रक्रिया को पहले के मुकाबले आसान बनाया जा सकता है.
यह पोर्टल सहकारी बैंकों और प्राथमिक कृषि लोन समितियों के लिए भी तैयार किया गया है. जानकारी के मुताबिक, एक साल से भी कम समय में यह व्यवस्था करीब 238 सहकारी बैंकों और लगभग 32 हजार प्राथमिक कृषि लोन समितियों तक पहुंच चुकी है.
इस पोर्टल की एक खास सुविधा यह भी है कि किसान अपने जिले में अलग-अलग फसलों के लिए उपलब्ध वित्तीय सीमा की जानकारी ले सकते हैं. इससे किसान को यह समझने में मदद मिलती है कि उसकी खेती और फसल के हिसाब से कितने कृषि लोन के लिए पात्रता बन सकती है. यानी आवेदन करने से पहले किसान को अपनी जरूरत और उपलब्ध लोन सीमा का अंदाजा मिल सकता है. इससे कर्ज लेने की प्रक्रिया को समझना भी आसान हो सकता है.
किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए खेती के रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए कर्ज लिया जा सकता है. इसमें बीज, खाद और कीटनाशक जैसी जरूरी चीजें खरीदने के लिए पैसा शामिल है. बैंक अधिकारियों के मुताबिक, पहले KCC के लिए आवेदन करने में किसानों को कई बार बैंक जाना पड़ता था. कागजी प्रक्रिया पूरी करने और जांच में तीन से चार सप्ताह तक का समय लग सकता था. डिजिटल प्रक्रिया का मकसद इसी तरह की दिक्कतों को कम करना है.
देश में जमीन वाले करीब 7.72 करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड सक्रिय हैं. इसमें खेती के अलावा दूसरे कृषि से जुड़े काम भी शामिल हैं. मत्स्य पालन के लिए करीब 2.4 लाख और पशुपालन से जुड़ी गतिविधियों के लिए करीब 44 लाख KCC जारी किए गए हैं. इससे पता चलता है कि किसान क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल सिर्फ फसल उगाने तक सीमित नहीं है. खेती के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन करने वाले लोग भी इसका इस्तेमाल अपनी कार्यशील पूंजी की जरूरत पूरी करने के लिए कर रहे हैं.
वित्त वर्ष 2026 में कमर्शियल बैंकों, सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने कृषि क्षेत्र को 32.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का लोन दिया. इसमें करीब 60 फीसदी हिस्सा कम समय के फसल लोन का था. बाकी पैसा खेती और उससे जुड़े कामों में निवेश के लिए दिया गया. किसान क्रेडिट कार्ड धारकों के लिए 3 लाख रुपये तक का कम समय वाला कृषि लोन 7 फीसदी सालाना ब्याज पर मिलता है. अगर किसान समय पर लोन चुका देते हैं, तो उन्हें 3 फीसदी की अतिरिक्त ब्याज छूट मिलती है. इससे किसानों के लिए लोन की असल ब्याज दर 4 फीसदी रह जाती है.
ई-किसान क्रेडिट कार्ड व्यवस्था का मकसद सिर्फ ऑनलाइन आवेदन लेना नहीं है. आधार, जमीन और फसल से जुड़ी जानकारी की डिजिटल जांच के जरिए लोन देने की प्रक्रिया को आसान और व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा रही है. नाबार्ड ने डिजिटल कृषि वित्त से जुड़ी कंपनी 24X7 मनीवर्क्स कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड में 10 फीसदी हिस्सेदारी भी खरीदी है. इस कंपनी ने कृषि अवसंरचना कोष के तहत ब्याज सहायता से जुड़े दावों को संभालने के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म भी बनाया है. इसके जरिए दावों की जांच और भुगतान की प्रक्रिया ऑनलाइन करने की कोशिश की जा रही है.