एग्रीवेट: 05 अक्टूबर 2026, भुवनेश्वर: गन्ना किसानों को मिलेगी प्रति एकड़ 15,000 रुपये की इनपुट सब्सिडी – ओडिशा सरकार ने राज्य के सहकारी चीनी मिलों के दायरे में आने वाले गन्ना किसानों के लिए इनपुट सब्सिडी बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बड़ंबा और आसिका सहकारी चीनी मिल क्षेत्रों के किसानों के लिए प्रति एकड़ 15,000 रुपये की इनपुट सब्सिडी वाली “सहकारी चीनी उद्योग क्षेत्रों में गन्ना उत्पादन प्रोत्साहन” योजना की एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि ।
यह घोषणा मुख्यमंत्री ने राज्यभर में प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) और बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियों (LAMPCS) के लिए शुरू किए गए ‘संबंध’ नामक सदस्यता अभियान के मंच से की। इस अभियान का सीधा मकसद ज्यादा से ज्यादा किसानों को इन सहकारी ढांचों से जोड़ना है।
सरकार के मुताबिक राज्य में 500 से ज्यादा सहकारी समितियों के जरिये 8 लाख से अधिक किसानों को वर्ष 2024-25 के लाभांश वितरण का फायदा मिलेगा। गन्ना किसानों के लिए इनपुट सब्सिडी इसी बड़े सहकारी नेटवर्क के भीतर दी जा रही पहलों का हिस्सा है।
प्राथमिक कृषि साख समितियां यानी PACS गांव स्तर पर किसानों को कम ब्याज पर कर्ज, खाद-बीज और भंडारण जैसी सुविधाएं देने का मुख्य माध्यम रही हैं। बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियां यानी LAMPCS खासतौर पर आदिवासी और दूरदराज इलाकों में यही काम करती हैं। ‘संबंध’ अभियान इन्हीं दोनों ढांचों की सदस्यता और पहुंच बढ़ाने पर केंद्रित है।
गन्ना किसानों के लिए इनपुट सब्सिडी के साथ ही अधिक चीनी मात्रा वाली गन्ने की बेहतर बीज किस्में भी उपलब्ध कराने की बात कही गई है, जिससे मिलों की चीनी रिकवरी दर में सुधार हो सके। ज्यादा रिकवरी दर का सीधा फायदा मिल और किसान दोनों को मिलता है, क्योंकि गन्ने की कीमत भी उसकी चीनी मात्रा से जुड़ी होती है।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर सहकारी संस्थाओं से राजनीतिक विचारों से ऊपर उठकर कृषि समुदाय को समर्थन देने की अपील की। कार्यक्रम में धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 3,100 रुपये प्रति क्विंटल का भी जिक्र हुआ, जो सहकारी ढांचे के जरिये किसानों तक पहुंचने वाले लाभों की कड़ी का हिस्सा बताया गया।
सरकार के मुताबिक गन्ना किसानों के लिए इनपुट सब्सिडी की राशि आने वाले पेराई सीजन से पहले किसानों के खातों में पहुंचाई जाएगी। बड़ंबा और आसिका की सहकारी चीनी मिलें ओडिशा के पुराने चीनी उद्योग केंद्रों में शामिल हैं, और इनके कमांड क्षेत्र के किसानों के लिए यह सब्सिडी गन्ने की खेती को फिर से आकर्षक बनाने की कोशिश का हिस्सा मानी जा रही है।
पिछले कुछ वर्षों में कई सहकारी चीनी मिलों के सामने घाटे और कम गन्ना आपूर्ति की समस्या रही है, क्योंकि किसान कई बार गन्ने के बदले दूसरी फसलों की तरफ रुख कर लेते हैं। इनपुट सब्सिडी और बेहतर बीज किस्मों से उम्मीद की जा रही है कि किसान फिर से गन्ने की खेती को प्राथमिकता दें, जिससे मिलों को पर्याप्त कच्चा माल मिल सके।
राज्य सरकार का कहना है कि ‘संबंध’ अभियान सिर्फ गन्ना किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिये धान, तिलहन और दलहन उत्पादक किसानों को भी सहकारी ढांचे से जोड़ने की कोशिश होगी। इससे खाद-बीज खरीद और उपज की बिक्री दोनों में किसानों को फायदा मिलने की बात कही जा रही है।
ओडिशा में गन्ना पेराई का सीजन आम तौर पर नवंबर-दिसंबर में शुरू होकर अगले साल अप्रैल तक चलता है। इनपुट सब्सिडी का फायदा उन्हीं किसानों को मिलेगा जो बड़ंबा और आसिका मिलों के तय कमांड क्षेत्र में खेती करते हैं, इसलिए किसानों को अपनी पात्रता की जानकारी स्थानीय सहकारी समिति या मिल प्रशासन से लेनी होगी।
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सब्सिडी और बीज वितरण की पूरी प्रक्रिया सहकारी समितियों के माध्यम से ही होगी, ताकि लाभ सीधे पंजीकृत किसानों तक पहुंच सके और बिचौलियों की भूमिका कम से कम रहे।