नर्मदापुरम में प्राकृतिक खेती कार्यशाला सह मेला, 700 से अधिक किसान हुए शामिल; नई कृषि तकनीकों की मिली जानकारी – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 04 अक्टूबर 2026, नर्मदापुरम: नर्मदापुरम में प्राकृतिक खेती कार्यशाला सह मेला, 700 से अधिक किसान हुए शामिल; नई कृषि तकनीकों की मिली जानकारी – सेवा संकल्प अभियान के तहत जिला प्रशासन नर्मदापुरम और कृषि विज्ञान केंद्र गोविंदनगर के संयुक्त तत्वावधान में भाऊसाहब भुस्कुटे स्मृति लोक न्यास, गोविंदनगर के कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में जिला स्तरीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला सह मेला आयोजित किया गया। इसमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए 700 से अधिक किसानों ने हिस्सा लिया। किसानों को प्राकृतिक खेती, कृषि में नई तकनीकों, फसल अवशेष प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में नर्मदापुरम-नरसिंहपुर सांसद दर्शन सिंह चौधरी, राज्यसभा सांसद माया नारोलिया, विधायक ठाकुरदास नागवंशी, प्रीति शुक्ला और कलेक्टर सोमेश मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।

कार्यशाला का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना और खेती को टिकाऊ, मृदा एवं पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए प्रेरित करना रहा। सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने किसानों से कम से कम एक एकड़ जमीन में अपने उपयोग के लिए प्राकृतिक खेती शुरू करने की अपील की।

उन्होंने घटते जल स्तर को देखते हुए उर्वरकों के संतुलित एवं कम उपयोग, फसल विविधीकरण, फसल चक्रण, मृदा संरक्षण और जल संरक्षण पर जोर दिया। राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने कहा कि स्वस्थ समाज के लिए स्वस्थ भोजन जरूरी है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। विधायक ठाकुरदास नागवंशी ने मृदा स्वास्थ्य पर ध्यान देने और फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के साथ नरवाई नहीं जलाने का आग्रह किया।

कृषि यंत्र और उत्पादों की प्रदर्शनीप्राकृतिक खेती कार्यशाला सह मेले में फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़े कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी लगाई गई। किसानों ने कृषि यंत्रों की कार्यप्रणाली और उपयोगिता की जानकारी ली। विभिन्न विभागों और प्रगतिशील किसानों द्वारा तैयार कृषि एवं अन्य उपयोगी उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने किसानों से रासायनिक खेती पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर बढ़ने की अपील की। उन्होंने नरवाई नहीं जलाने और फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने पर भी जोर दिया।

तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने दी जानकारीकार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र में सहायक प्राध्यापक, कृषि महाविद्यालय पवारखेड़ा डॉ. धनंजय कटहल ने फसलों में कीट व्याधि की पहचान एवं प्रबंधन, डॉ. दीपक खांडे ने अलनीनो के विपरीत प्रभाव से फसलों के प्रबंधन और कृषि विज्ञान केंद्र गोविंदनगर के वैज्ञानिक डॉ. राजेन्द्र पटेल ने फसल अवशेष प्रबंधन की जानकारी दी।

द्वितीय तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. देवीदास पटेल ने जैविक एवं प्राकृतिक खेती प्रबंधन, डॉ. ब्रजेश कुमार नामदेव ने जैविक खेती में कीट व्याधि प्रबंधन और कार्यक्रम सहायक डॉ. प्रवीण सोलंकी ने मृदा परीक्षण के महत्व एवं लाभ के बारे में बताया। कार्यक्रम में कृषि छात्रों ने फसल नरवाई प्रबंधन और स्वच्छता अभियान को लेकर नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. ब्रजेश कुमार नामदेव ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

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