एग्रीवेट: Milk Production: मध्य प्रदेश के पशुपालकों और दूध का काम करने वाले किसानों के लिए डेयरी सेक्टर से जुड़ी कई अहम बातें सामने आई हैं. भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने दूध उत्पादन के साथ-साथ गोबर से जैविक खाद और बायोगैस बनाने, दूध से अलग-अलग उत्पाद तैयार करने और उन्हें बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया. सम्मेलन में 35 हजार से ज्यादा गोपालकों और डेयरी सहकारी समितियों से जुड़े लोगों के शामिल हुए.
पशुपालन में सिर्फ दूध बेचकर कमाई करने के बजाय गोबर और दूध से जुड़े दूसरे कामों को भी बढ़ावा देने की बात कही गई. गोबर से बायोगैस और जैविक खाद बनाई जा सकती है, जबकि दूध की प्रोसेसिंग करके दही, छाछ, लस्सी और दूसरे उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं. इस तरह पशुपालकों को अपनी उपज बेचने के लिए सिर्फ एक बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. सरकार का जोर सहकारी व्यवस्था के जरिए गांव स्तर पर पशुपालकों को बाजार से जोड़ने पर है.
डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए उज्जैन में 255 करोड़ रुपये की लागत से मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का भूमि-पूजन किया गया. इसकी क्षमता रोजाना 3 लाख लीटर दूध की प्रोसेसिंग की होगी. वहीं भोपाल में 40 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले डेयरी प्लांट का उद्घाटन भी कार्यक्रम से जुड़ा रहा. इस तरह की प्रोसेसिंग सुविधाओं से दूध को सीधे बेचने के बजाय उससे वैल्यू वाले उत्पाद तैयार करने का रास्ता खुलेगा. इससे डेयरी कारोबार को गांव से लेकर बाजार तक मजबूत करने में मदद मिल सकती है.
सम्मेलन में सहकारी डेयरी नेटवर्क को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया. अमित शाह ने सम्मेलन के दौरान कहा कि, देशभर में 75 हजार नई सहकारी डेयरियां खोली जाएंगी. इसमें मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में डेयरियां स्थापित करने का लक्ष्य है. सहकारी डेयरी से जुड़कर छोटे पशुपालकों को दूध बेचने, भुगतान पाने और बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है.
अमित शाह ने कहा कि सहकारिता आंदोलन महिलाओं को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है. डेयरी से जुड़कर बड़ी संख्या में महिलाएं कमाई कर रही हैं और अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं. उन्होंने यह भी कहा कि, मध्य प्रदेश को पूरी तरह नशे से मुक्त करने के लिए सरकार लगातार काम करेगी और राज्य को मादक पदार्थों से मुक्त बनाया जाएगा.