यूपी के 32 जिलों में बारिश का कहर.. दीवार ढहने से 4 ग्रामीणों की मौत.. धान-मक्का फसलें चौपट – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Uttar Pradesh Farmers News: उत्तर प्रदेश में मॉनसून गतिविधि तेज होने से कई हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की जा रही है. लखनऊ मौसम केंद्र के अनुसार राज्य के 32 जिले तेज बारिश, बाढ़ और आंधी से प्रभावित हैं. इन जिलों में स्कूलों की छुट्टी कर दी गई है. वहीं, अलग-अलग जगहों पर बारिश से दीवार ढहने के चलते 4 लोगों की मौत हो गई है. गोमती समेत अन्य नदियां खतरे के निशान पर बह रही हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों को नदी-नालों से दूर रहने की सलाह दी है और सभी जिलाधिकारियों को राहत एवं सहायता कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं. भयंकर बारिश के चलते नदियों का पानी खेतों में जमा हो गया है, जिससे अवध और पूर्वांचल क्षेत्र के जिलों में धान, मक्का समेत अन्य खरीफ फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है.

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भारी बारिश दर्ज की गई है जो अगले दो दिनों में बढ़ने की चेतावनी दी गई है. भारी बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए राज्य सरकार ने जिला प्रशासन को अलर्ट पर रखा है. मौसम विभाग के बुलेटिन के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव (डीप डिप्रेशन) के उत्तरी आंध्र प्रदेश-दक्षिणी ओडिशा तट को पार करके उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने से बने मौसम तंत्र के अगले 12 घंटों तक अपनी तीव्रता बनाए रखने की संभावना है. इसके बाद अगले 12 घंटों में यह धीरे-धीरे कमजोर होकर एक ‘वेल-मार्क्ड लो-प्रेशर एरिया’ (स्पष्ट कम दबाव वाला क्षेत्र) में बदल सकता है.

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि तेज बारिश से राज्य के कुछ जल-ग्रहण क्षेत्रों (watersheds) में अचानक बाढ़ (flash floods) आ सकती है. बारिश के साथ जमीन पर तेज हवाएं भी चल सकती हैं, जिनकी गति 30-40 किमी प्रति घंटा और झोंके 50 किमी प्रति घंटा तक हो सकते हैं. वहीं, कुछ जगहों पर 40-50 किमी प्रति घंटा और कभी-कभी 60 किमी प्रति घंटा की रफ़्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर और पूर्वी उत्तर प्रदेश में ज्यादातर जगहों पर बारिश और गरज के साथ बौछारें दर्ज की गई हैं. अगले 48 घंटों में अधिकतम तापमान में भी 4-7 डिग्री सेल्सियस की काफी गिरावट आने की संभावना है. मौसम प्रणाली के कारण राज्य में 27 सितंबर तक मॉनसून के सक्रिय रहने की उम्मीद है.

रेड और ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में खासकर जलभराव और बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं. सुरक्षा और राहत एजेंसियों को आज़मगढ़, बलिया, ग़ाज़ीपुर, मऊ, महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, अंबेडकर नगर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, अयोध्या, गोंडा, श्रावस्ती, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बहराइच, हरदोई, लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली, बाराबंकी, अमेठी, फतेहपुर, कानपुर नगर, बांदा, कौशांबी और चित्रकूट के कुछ हिस्सों में अचानक बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया गया है.

लखीमपुर खीरी एवं अमेठी जिलों में अलग-अलग घटनाओं में मिट्टी की दीवार गिरने से कम से कम चार लोगों की मौत हो गयी. पुलिस ने बताया कि लखीमपुर खीरी जिले के नीमगांव पुलिस थाना क्षेत्र के रहमत नगर गांव में शनिवार तड़के एक झोपड़ी की मिट्टी की दीवार ढहने से उसके मलबे में दबकर एक ही परिवार के तीन व्यक्तियों की मृत्यु हो गई.

अवध और पूर्वांचल क्षेत्र के 32 से ज्यादा जिलों में बारिश से नदियां उफनाई हुई हैं और बाढ़ के हालात बने हुए हैं. इन जिलों में धान और मक्का के खेतों में पानी भरने से फसलें डूब गई हैं. तेज हवा और पानी भरने से पकी और कच्ची धान की फसल खेतों में बिछ गई है. लगातार नमी से बालियां काली होने और दाने खराब होने का खतरा बढ़ गया है. जबकि, मक्का और दलहनी फसलों का दाना झड़ने और सड़ने लगा है. इसके अलावा गन्ना, तिल, अरहर और हरी सब्जियों जैसे नेनुआ, कद्दू, तोरई और फूलगोभी को जलभराव के कारण भारी नुकसान हुआ है.

#देखें | हापुड, उत्तर प्रदेश: मौसम अलर्ट पर सीडीओ श्रुति शर्मा का कहना है, “…मौसम विभाग ने भारी बारिश और तेज नदी धाराओं के लिए हाई अलर्ट जारी किया है। सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं, और आपदा प्रबंधन और अन्य विभाग हाई अलर्ट पर हैं। लोग… pic.twitter.com/NxC9DkUHvj

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद राहत आयुक्त डॉ. ऋषिकेश भास्कर यशोद ने रेड और ऑरेंज मौसम अलर्ट वाले जिलों के ज़िलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों को जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने और मौसम से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. जिला मजिस्ट्रेटों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे पब्लिक एड्रेस सिस्टम और स्थानीय संचार माध्यमों से मौसम की चेतावनी और सुरक्षा सलाह लोगों तक पहुंचाएं और जोखिम वाले इलाकों में रहने वाले लोगों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें. अधिकारियों से कहा गया है कि वे राहत और बचाव के इंतजामों को चालू रखें और बाढ़, जल-जमाव, बिजली गिरने या तेज हवाओं जैसी स्थितियों में बिना देरी किए जरूरी कदम उठाएं.

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