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कृषक समग्र विकास योजना

1. योजना की पृष्ठभूमि

राज्य में कृषि उत्पादन, उत्पादकता, फसल विविधीकरण, बीज संवर्धन, सिंचाई विस्तार तथा यंत्रीकरण को एकीकृत रूप से बढ़ावा देने के उद्देश्य से “कृषक समग्र विकास योजना” लागू की गई।

यह योजना विभिन्न पूर्व संचालित घटकों को समेकित कर किसानों को एक ही मंच पर तकनीकी सहायता, अनुदान एवं संसाधन उपलब्ध कराने की व्यापक पहल है।

संशोधन आदेशों के माध्यम से समय-समय पर बीज उत्पादन, बीज वितरण, उद्यानिकी, कृषि यंत्रीकरण तथा विशेष योजनाओं को इस योजना में समाहित किया गया।

2. योजना का उद्देश्य

  1. कृषकों को उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़ना।
  2. प्रमाणित/आधार बीज उत्पादन एवं वितरण को बढ़ावा देना।
  3. फसल विविधीकरण एवं उत्पादकता वृद्धि।
  4. लघु एवं सीमांत किसानों की आय संवर्धन।
  5. कृषि यंत्रीकरण एवं संसाधन सुदृढ़ीकरण।
  6. कृषि, उद्यानिकी एवं संबद्ध गतिविधियों का समेकित विकास।

3. प्रमुख घटक (संशोधनों सहित)

(A) अवनी बीज संवर्धन योजना

संशोधित प्रावधान (2012, 2014, 2015 के अनुसार):

  • स्व-परागण एवं पर-परागण किस्मों पर बीज उत्पादन अनुदान में वृद्धि।
  • बीज उत्पादन पर ₹300 प्रति क्विंटल से बढ़ाकर ₹500 प्रति क्विंटल।
  • प्रमाणित बीज वितरण पर ₹200 से बढ़ाकर ₹500 प्रति क्विंटल अनुदान।
  • तिलहनी फसलों पर ₹1000 प्रति क्विंटल तक अनुदान (संशोधित आदेशानुसार)।

बीज उत्पादन कार्य राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था एवं राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के माध्यम से किया जाएगा।

(B) बीज वितरण एवं बीज प्रतिस्थापन कार्यक्रम

  • प्रमाणित/आधार बीज पर 50 प्रतिशत तक अनुदान।
  • बीज प्रतिस्थापन दर (SRR) बढ़ाने पर विशेष जोर।
  • धान, गेहूं, दलहन एवं तिलहन फसलों को प्राथमिकता।

(C) कृषि यंत्रीकरण

  • पंप सेट, स्प्रेयर, पावर टिलर, कृषि उपकरणों पर अनुदान।
  • लघु एवं सीमांत कृषकों हेतु 50 प्रतिशत या निर्धारित अधिकतम सीमा तक सहायता।
  • चयनित यंत्रों पर राज्य अंशदान के साथ केंद्र प्रायोजित योजनाओं का समेकन।

(D) उद्यानिकी एवं बागवानी विकास

फल पौधारोपण पर 50 प्रतिशत तक अनुदान।

  • ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई पर अनुदान।
  • प्रति पौधा लागत के आधार पर संशोधित सहायता (पूर्व ₹2 प्रति पौधा से संशोधित ₹5 प्रति पौधा तक)।

(E) विशेष पहल

संशोधन आदेश (2015) के अनुसार निम्न योजनाओं का समावेशन:

  1. उन्नत बीज उत्पादन कार्यक्रम
  2. गन्ना विकास कार्यक्रम
  3. नाडेप विधि से जैविक खाद निर्माण
  4. राज्य स्तरीय समेकित कृषि विकास कार्यक्रम

4. चयन प्रक्रिया

  • ग्राम पंचायत की अनुशंसा पर पात्र कृषकों का चयन।
  • लघु एवं सीमांत कृषकों को प्राथमिकता।
  • प्रथम आओ, प्रथम पाओ सिद्धांत (जहाँ लागू)।
  • भौतिक सत्यापन अनिवार्य।

5. वित्तीय प्रावधान

योजना के व्यय निम्न मांग शीर्षों के अंतर्गत वहन किए जाते हैं:

  • मांग संख्या 13 – कृषि कार्य
  • मांग संख्या 41 – अनुसूचित जनजाति उपयोजना
  • मांग संख्या 64 – अनुसूचित जाति उपयोजना
  • संबंधित राज्य/केंद्र प्रायोजित मद

6. निरीक्षण एवं अनुश्रवण

  • ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा प्राथमिक सत्यापन।
  • वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी द्वारा अनुमोदन।
  • 100 प्रतिशत भौतिक निरीक्षण (जहाँ आवश्यक)।
  • अनुदान राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में अंतरण।

7. संशोधन का सार

वर्षप्रमुख संशोधन
2012बीज उत्पादन एवं वितरण अनुदान में वृद्धि
2013यंत्रीकरण घटकों में संशोधन
2014उद्यानिकी एवं पौधारोपण अनुदान संरचना में परिवर्तन
2015अतिरिक्त योजनाओं का समावेशन एवं समेकन

8. अपेक्षित परिणाम

  • बीज प्रतिस्थापन दर में वृद्धि
  • सिंचित एवं उच्च उत्पादकता क्षेत्र विस्तार
  • कृषि लागत में कमी
  • किसानों की आय में वृद्धि
  • कृषि क्षेत्र में तकनीकी सुदृढ़ीकरण

निष्कर्ष

“कृषक समग्र विकास योजना” राज्य की कृषि नीतियों का एक व्यापक एवं बहुआयामी ढांचा है, जिसमें बीज, सिंचाई, यंत्रीकरण, उद्यानिकी एवं प्रशिक्षण जैसे घटकों को एकीकृत कर किसानों को समग्र समर्थन प्रदान किया गया है।

संशोधित दिशा-निर्देशों के माध्यम से योजना को अधिक व्यवहारिक, पारदर्शी एवं परिणामोन्मुख बनाया गया है, जिससे राज्य में कृषि उत्पादन एवं किसान समृद्धि की दिशा में स्थायी प्रगति सुनिश्चित हो सके।

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