भारत की इस छिपकली को क्यों खा रहा चीन? टोके गेको की कीमत और तस्करी से मचा हड़कंप – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: करोड़ों में बिकने वाली भारत की छिपकली को चीनी में तस्करी किया जा रहा है और उसे वहां पर दवाओं आदि में इस्तेमाल करके खाया जा रहा है. असम में राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) की कार्रवाई के बाद छिपकली प्रजाति की टोके गेको एक बार फिर चर्चा में है. DRI ने 22 सितंबर 2026 को मारियानी के बंदर चालिया गांव मैदान में दो लोगों को रोककर उनके कब्जे से 86 जिंदा टोके गेको छिपकलियां बरामद कीं. दोनों तस्करों को गिरफ्तार कर लिया गया. बरामद गेको और आरोपियों को आगे की कार्रवाई के लिए मारियानी रेंज फॉरेस्ट ऑफिस को सौंप दिया गया. बता दें कि इस छिपकली की कीमत करोड़ों रुपये होने का दावा किया जाता है.

टोके गेको की कीमत को लेकर इंटरनेट और मीडिया रिपोर्ट्स में अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं. कुछ रिपोर्ट्स में इसके एक जीव की कीमत 1 करोड़ रुपये तक बताए जाने का दावा किया गया है. हालांकि, किसी एक तय अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमत  को आधिकारिक रूप से मान्य नहीं किया गया है. कीमत को लेकर किए जाने वाले ऐसे दावों को सावधानी से देखना जरूरी है. अलग-अलग बाजारों में इसकी कीमत आकार, स्थिति और मांग के आधार पर बदल सकती है. इस छिपकली की मांग के पीछे मुख्य वजहों में पारंपरिक चिकित्सा से जुड़ी मान्यताएं और विदेशी पालतू जीवों के बाजार में इसकी मांग बताई जाती है. DRI ने भी कहा है कि वन्यजीवों की ऐसी प्रजातियों को उनकी कथित औषधीय उपयोगिता और विदेशी पालतू जीव के तौर पर मांग के कारण अवैध बाजारों में निशाना बनाया जाता है.

टोके गेको की तस्करी पर DRI का बड़ा एक्शन, दो आरोपी गिरफ्तार.

टोके गेको को भारत के वन्यजीव संरक्षण  अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में रखा गया है. इसके अलावा यह CITES के Appendix-II में भी शामिल है, जिसके तहत इसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित किया जाता है. ऐसे में इसका अवैध कब्जा और व्यापार कानूनी कार्रवाई के दायरे में आता है. असम में हुई कार्रवाई में DRI ने 86 जीवित टोके गेको को जब्त किया. दोनों पकड़े गए लोगों को भी बरामद वन्यजीवों के साथ मारियानी रेंज फॉरेस्ट ऑफिस को सौंप दिया गया, जहां वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जानी है.

टोके गेको की यह कार्रवाई वन्यजीव तस्करी के खिलाफ DRI की लगातार  चल रही कार्रवाई का हिस्सा है. इससे पहले 9 सितंबर को DRI ने बताया था कि देशभर में 10 दिनों के दौरान छह अलग-अलग अभियानों में दो तेंदुए की खाल, 180 जीवित भारतीय तारा कछुए, 12 जीवित टोके गेको, करीब 24 किलोग्राम पैंगोलिन के शल्क और 500 ग्राम बाघ की हड्डियां जब्त की गई थीं. इन अभियानों में 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. DRI के मुताबिक, ये अभियान खुफिया सूचनाओं के आधार पर वन विभाग, वन्यजीव अपराध नियंत्रण से जुड़ी एजेंसियों और अन्य विभागों के साथ समन्वय में चलाए गए. असम में 86 जिंदा टोके गेको की बरामदगी से एक बार फिर अवैध वन्यजीव व्यापार और इसके अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर कार्रवाई की जरूरत सामने आई है.

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