एग्रीवेट: Karnataka Drought Relief: कर्नाटक में कमजोर बारिश के चलते सूखे की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है. राज्य में सूखा प्रभावित तालुका की संख्या बढ़कर 177 हो गई है. इसी बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र से 1,852.65 करोड़ रुपये की अंतरिम सहायता देने का अनुरोध किया है. यह रकम राज्य की ओर से मांगी गई 3,705.30 करोड़ रुपये की कुल सूखा राहत राशि का करीब 50 फीसदी है. मुख्यमंत्री का कहना है कि केंद्र से अंतरिम मदद मिलने पर फसल नुकसान, पेयजल, पशुधन और दूसरे जरूरी राहत कामों को तुरंत आगे बढ़ाया जा सकेगा. उन्होंने राज्य आपदा मोचन कोष यानी एसडीआरएफ की दूसरी किस्त में केंद्र का हिस्सा भी पहले जारी करने की मांग की है.
कर्नाटक सरकार ने शुरुआत में खरीफ 2026 के लिए 101 तालुका को सूखा प्रभावित मानते हुए 3,705.30 करोड़ रुपये की सहायता मांगी थी. इसके बाद सूखा प्रबंधन नियमावली 2020 में तय मानकों के आधार पर 76 और तालुका को सूखा प्रभावित घोषित किया गया. इससे कुल संख्या 177 हो गई है. राज्य सरकार का कहना है कि अभी स्थिति और बिगड़ सकती है. मुख्यमंत्री ने आशंका जताई है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून खत्म होने तक सूखा प्रभावित तालुका की संख्या 200 से ज्यादा हो सकती है. नए प्रभावित इलाकों में हुए नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है.
कम बारिश का सीधा असर खेती पर पड़ रहा है. शिवकुमार के मुताबिक, बारिश और मिट्टी में नमी की स्थिति लगातार खराब रहने से 40 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में फसल नुकसान हो सकता है. दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कर्नाटक की खेती के लिए बेहद अहम है, लेकिन इसका असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहता. इसी बारिश से जलाशयों में पानी भरता है, बिजली उत्पादन के लिए पानी मिलता है, पशुओं के लिए चारा उपलब्ध होता है और भूजल स्तर भी बढ़ता है. इस बार बारिश की कमी ने इन सभी क्षेत्रों पर दबाव बढ़ाया है.
कर्नाटक गंभीर और लगातार बिगड़ती सूखे की स्थिति का सामना कर रहा है, 177 तालुकों को अब आधिकारिक तौर पर सूखा प्रभावित घोषित किया गया है और आने वाले महीनों में स्थिति और गंभीर होने की संभावना है। लंबे समय तक वर्षा की कमी ने फसलों, पानी की उपलब्धता, पशुधन और… pic.twitter.com/D93f3VE8xx को प्रभावित किया है
कावेरी बेसिन के जलाशयों में कम पानी भी राज्य सरकार के लिए बड़ी चिंता है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि अगर जलाशयों में पानी का स्तर कम रहा तो आने वाले महीनों में बेंगलुरु और आसपास के जिलों में पेयजल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है. गर्मी आने पर यह समस्या और बढ़ने की आशंका जताई गई है. यानी सूखे का असर सिर्फ किसानों की फसल तक सीमित नहीं है. इसका असर पीने के पानी, पशुधन, बिजली और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.
कर्नाटक सरकार केंद्र से मिलने वाली अंतरिम सहायता का इस्तेमाल फसल नुकसान के लिए इनपुट सब्सिडी, पेयजल की व्यवस्था, पशुधन की सुरक्षा और दूसरे जरूरी राहत कामों में करना चाहती है. सरकार का तर्क है कि केंद्र की नियमित मंजूरी प्रक्रिया पूरी होने में समय लग सकता है, जबकि प्रभावित इलाकों में राहत की जरूरत अभी है. इसके अलावा शिवकुमार ने एसडीआरएफ की दूसरी किस्त में केंद्र का हिस्सा पहले जारी करने की भी मांग की है, ताकि राज्य के पास तुरंत राहत देने के लिए अतिरिक्त पैसा उपलब्ध हो सके.
कर्नाटक में सूखे को लेकर सरकार पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है. भाजपा की ओर से किसानों के लिए अतिरिक्त राहत की मांग उठाई गई है. कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने किसानों के 5 लाख रुपये तक के कृषि कर्ज माफ करने और प्रभावित किसानों को 50,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की है. विधानसभा में विपक्ष के उपनेता अरविंद बेल्लद ने भी सूखे से निपटने के राज्य सरकार के तरीके पर सवाल उठाए हैं. विपक्ष का कहना है कि प्रभावित किसानों तक पहुंच रही मदद पर्याप्त नहीं है. ये विपक्ष की मांग और आलोचनाएं हैं, जबकि राज्य सरकार केंद्र से अंतरिम सहायता मांग रही है.