एग्रीवेट: Bihar Cabinet: बिहार में पशुपालकों और किसानों के लिए सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में शिक्षा, पशुपालन और उद्योग से जुड़े कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. इनमें सबसे अहम फैसला पशुपालकों के लिए मुख्यमंत्री गो-धन विकास ऋण योजना को मंजूरी देना है. इस योजना के तहत बैंक से मिलने वाले कर्ज के ब्याज पर सरकार 100 फीसदी सब्सिडी देगी.
इसके अलावा कोसी क्षेत्र में डेयरी का काम बढ़ाने और नवादा के वारिसलीगंज में नई चीनी मिल लगाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है. इन फैसलों से दूध उत्पादन, रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने की कोशिश की जाएगी.
मुख्यमंत्री गो-धन विकास ऋण योजना के तहत पशुपालकों को बैंक से कर्ज लेने पर ब्याज की पूरी राशि पर सब्सिडी मिलेगी. इसका मतलब है कि लाभ लेने वाले पशुपालकों को सिर्फ कर्ज की मूल रकम चुकानी होगी, जबकि ब्याज का बोझ सरकार उठाएगी. बिहार सरकार ने इस योजना के लिए 1,600 करोड़ रुपये से ज्यादा की मंजूरी दी है. योजना के तहत पशुपालक तीन उन्नत नस्ल की गाय या दो भैंस रखकर दूध का कारोबार शुरू या बढ़ा सकेंगे. इससे छोटे स्तर पर डेयरी का काम करने वाले लोगों को भी फायदा मिल सकता है. सरकार का लक्ष्य दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ पशुपालकों के लिए रोजगार और कमाई के नए मौके तैयार करना है.
कैबिनेट ने कोसी क्षेत्र में डेयरी विकास से जुड़ी आठ परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है. इसके तहत इलाके में 500 नई दुग्ध सहकारी समितियां बनाने की योजना है. इसके साथ ही डेयरी और दूध को ठंडा रखने से जुड़ी सुविधाओं का विकास किया जाएगा. मिल्क चिलिंग सेंटर और बल्क मिल्क कूलिंग यूनिट जैसी सुविधाएं तैयार होने से दूध को ज्यादा समय तक सुरक्षित रखने और उसे बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है. इन आठ परियोजनाओं के लिए सरकार ने 126.07 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. नई समितियां बनने से ज्यादा पशुपालकों को डेयरी कारोबार से जोड़ने का रास्ता भी खुल सकता है.
इसके तहत लाभुकों को केवल मूलधन का भुगतान करना होगा। 3 उन्नत गाय या 2 भैंस के माध्यम से दुग्ध उत्पादन, रोजगार और पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी।
बिहार सरकार ने नवादा के वारिसलीगंज में नई चीनी मिल लगाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है. इस परियोजना में 500 करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश का प्रस्ताव है. चीनी मिल शुरू होने से आसपास के गन्ना किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए स्थानीय स्तर पर बाजार मिल सकता है. अभी कई किसानों को गन्ना बेचने के लिए दूर के बाजारों और मिलों पर निर्भर रहना पड़ता है. सरकार के मुताबिक, इस परियोजना का फायदा सिर्फ नवादा तक सीमित नहीं रहेगा. नालंदा, शेखपुरा और जमुई के गन्ना किसानों को भी इससे फायदा मिलने की उम्मीद है.
बिहार कैबिनेट के इन फैसलों में एक तरफ पशुपालन और दूध उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर है, तो दूसरी तरफ गन्ना किसानों के लिए चीनी उद्योग का रास्ता मजबूत करने की कोशिश की गई है. गो-धन विकास ऋण योजना में ब्याज पर पूरी सब्सिडी से पशुपालकों का कर्ज का बोझ कम हो सकता है. वहीं, कोसी में डेयरी का नेटवर्क बढ़ने से दूध के संग्रह और बिक्री की सुविधाएं बेहतर होने की उम्मीद है.