हरियाणा में छुट्टा गायों पर बड़ा फैसला! 4 गौवन से लेकर 300 करोड़ के चारा अनुदान तक, जानें पूरा प्लान – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Haryana Gau Van: हरियाणा में गांवों और शहरों की सड़कों पर घूम रही बेसहारा गायों की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने कई कदम उठाने की तैयारी की है. इसके तहत राज्य में चार गौवन विकसित किए जा रहे हैं. साथ ही नई गौशालाएं खोलने और पुरानी गौशालाओं को फिर से शुरू करने की योजना पर भी काम चल रहा है. सरकार का लक्ष्य सड़कों पर घूम रही गायों को सुरक्षित जगह, चारा और जरूरी देखभाल उपलब्ध कराना है. हरियाणा सार्वजनिक उपक्रम ब्यूरो (HBPE) के चेयरमैन मोहनलाल कौशिक ने सोमवार को चंडीगढ़ में गौसेवा आयोग के पदाधिकारियों के साथ बैठक में इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि राज्य में करीब 70 हजार गायें अभी सड़कों पर घूम रही हैं.

गायों के लिए चारे की कमी न हो, इसके लिए ग्राम पंचायतों को गौचरान भूमि में से कम से कम 10 एकड़ जमीन गौशालाओं को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं. सरकार का कहना है कि गौसेवा आयोग, ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों की मदद से सड़कों पर घूम रही गायों को धीरे-धीरे गौशालाओं और गौवन में पहुंचाया जाएगा. अभी राज्य की करीब 707 रजिस्टर्ड गौशालाओं में लगभग 40 हजार गायों को रखा जा रहा है. बाकी गायों को भी दूसरे आश्रय स्थलों में भेजने के लिए अभियान चलाया जाएगा.

हरियाणा में चार जगहों पर गौवन विकसित करने का काम चल रहा है. महेंद्रगढ़ के भोजावास गांव में 89 एकड़ जमीन पर बन रहा गौवन अंतिम चरण में पहुंच गया है. इसके अलावा पलवल के राजपुरा खादर, कैथल के भूना और करनाल के सांभली गांव में भी गौवन विकसित किए जा रहे हैं.

सड़कों पर घूम रही गायों के लिए ज्यादा जगह तैयार करने की दिशा में सरकार 22 गौशालाओं को फिर से शुरू करने की तैयारी कर रही है. इसके अलावा 14 नई गौशालाएं खोलने की प्रक्रिया भी चल रही है. सरकार का कहना है कि अतिरिक्त गौशालाएं तैयार होने के बाद सड़कों पर घूम रही गायों को वहां भेजने का अभियान और तेज किया जाएगा. इससे गांवों और शहरों में बेसहारा पशुओं की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है.

गायों के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था करना भी सरकार की योजना का अहम हिस्सा है. इसके तहत रजिस्टर्ड गौशालाओं को चारा खरीदने के लिए आर्थिक मदद दी जाएगी. सरकार ने इस साल गौशालाओं को 300 करोड़ रुपये का चारा अनुदान देने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए आवेदन पोर्टल खुला है और रजिस्टर्ड गौशालाएं 14 अक्टूबर तक आवेदन कर सकती हैं. आवेदन के बाद पात्र गौशालाओं को छह महीने के चारे के लिए अनुदान की किस्त दी जाएगी.

घायल और बीमार गायों को समय पर मदद मिल सके, इसके लिए राज्य की रजिस्टर्ड गौशालाओं को जल्द ई-रिक्शा उपलब्ध कराने की योजना है. इनका इस्तेमाल ‘गौ सेवा रथ’ के तौर पर किया जाएगा. इन वाहनों की मदद से घायल या बीमार गायों को इलाज और दूसरी जरूरी सेवाओं तक पहुंचाने में आसानी होगी.

गर्मी, बारिश और ठंड से गायों को बचाने के लिए 200 गौशालाओं में लोहे के शेड बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है. एक शेड के निर्माण के लिए 10 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाती है. पिछले साल 49 गौशालाओं में ऐसे शेड बनाए गए थे. अब इस सुविधा को और ज्यादा गौशालाओं तक पहुंचाने की तैयारी है.

सरकार ने किसानों को बेहतर नस्ल की गायें उपलब्ध कराने के लिए भी काम शुरू किया है. हिसार स्थित लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में गायों की नस्ल सुधार के लिए प्रयोगशाला स्थापित की गई है. अधिकारियों को इस काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं. इसके साथ ही सुखदर्शनपुर में गौवंश अनुसंधान केंद्र बनाने की योजना है, जहां पंचगव्य से जुड़े उत्पाद भी तैयार किए जाएंगे. सरकार का कहना है कि इन कदमों के जरिए एक तरफ सड़कों पर घूम रही गायों को सुरक्षित आश्रय दिया जाएगा, वहीं दूसरी तरफ चारे, इलाज और बेहतर नस्ल जैसी सुविधाओं पर भी काम किया जाएगा.

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