बंगाल में मत्स्य पालन और जलीय कृषि को मिलेगा बढ़ावा, 6 जलाशयों के विकास के लिए ₹49.95 करोड़ की मंजूरी – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 23 सितंबर 2026, नई दिल्ली: बंगाल में मत्स्य पालन और जलीय कृषि को मिलेगा बढ़ावा, 6 जलाशयों के विकास के लिए ₹49.95 करोड़ की मंजूरी – मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार ने 21 सितंबर 2026 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में मत्स्य पालन और जलीय कृषि के विकास की समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक की सह-अध्यक्षता केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी और पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह तथा पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने की। एक दशक से अधिक समय के बाद आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक का उद्देश्य पश्चिम बंगाल की मत्स्य पालन क्षमता की अप्रयुक्त संभावनाओं को साकार करने के लिए रूपरेखा तैयार करना था।

बैठक पश्चिम बंगाल सरकार के मत्स्य पालन विभाग एवं पशु संसाधन विकास विभाग के प्रभारी मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री राजेश महता और मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति में हुई। इसमें भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग, पश्चिम बंगाल राज्य मत्स्य पालन विभाग, राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के संस्थानों, राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीएफजीआर), केंद्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान (सीआईएफई), नाबार्ड, एनसीडीसी, भारतीय तटरक्षक बल, तटीय जलीय कृषि प्राधिकरण (सीएए), निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी) और समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) के अधिकारी भी शामिल हुए।

केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री श्री सुवेंदु अधिकारी को ₹83.25 करोड़ की लागत से 6 जलाशयों के विकास के लिए ₹49.95 करोड़ के केंद्रीय हिस्से के साथ प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की।

केंद्रीय मंत्री ने पश्चिम बंगाल में मत्स्य पालन की व्यापक अप्रयुक्त क्षमता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि देश का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक राज्य होने के बावजूद पश्चिम बंगाल में उत्पादकता, जलीय कृषि, निर्यात और मूल्य संवर्धन बढ़ाने की महत्वपूर्ण संभावनाएं हैं। राज्य वर्तमान में करीब ₹5,000 करोड़ के मत्स्य उत्पादों का निर्यात करता है, जिसे जलीय कृषि के विस्तार के जरिए बढ़ाकर ₹15,000-20,000 करोड़ तक ले जाने की क्षमता है।

उन्होंने सुंदरबन में जलीय कृषि आधारित निर्यात बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया। इसमें ब्लैक टाइगर झींगा, मड क्रैब, हिल्सा और सजावटी मछलियों जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के साथ निर्यातोन्मुखी बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत का मछली उत्पादन 2014 में 95.7 लाख टन से बढ़कर 197.75 लाख टन हो गया है, जबकि मत्स्य निर्यात बढ़कर ₹73,890 करोड़ हो गया है। उन्होंने आगामी पीएमएमएसवाई 2.0 के तहत बीज की गुणवत्ता, चारा, रोग प्रबंधन, कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे, मछली पकड़ने के बंदरगाहों, मछली उतारने के केंद्रों और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने पश्चिम बंगाल में उत्पादन, उत्पादकता और निर्यात बढ़ाने के लिए भारत सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री श्री सुवेंदु अधिकारी ने उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और सुंदरबन क्षेत्र में मत्स्य पालन की विशाल क्षमता को रेखांकित किया। उन्होंने पीएमएमएसवाई, राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल मंच (एनएफडीपी) और पीएम-एमकेएसएसवाई जैसी योजनाओं के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने गहरे समुद्र में काम करने वाले मछुआरों की सुरक्षा के लिए संचार प्रणालियों, वायरलेस संपर्क, नियंत्रण कक्ष के बुनियादी ढांचे और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने की जरूरत बताई। साथ ही सागरमाला जैसी पहलों के तहत मछली पकड़ने के बंदरगाहों, कोल्ड-चेन, आपूर्ति श्रृंखलाओं और तटीय गांवों के विकास पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने मत्स्य पालन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और इस क्षेत्र पर निर्भर करीब 50 लाख लोगों तक अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए राज्य और केंद्र सरकार के बीच पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

पश्चिम बंगाल सरकार के मत्स्य पालन विभाग एवं पशु संसाधन विकास विभाग के प्रभारी मंत्री श्री राजेश महता ने बताया कि राज्य में 2025-26 में 25.43 लाख मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ। इससे पश्चिम बंगाल देश में दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक राज्य बना हुआ है। राज्य ने प्रमुख मछली बीज उत्पादक के रूप में भी अपनी स्थिति बरकरार रखी है।

उन्होंने बेहतर बीज, चारा, फार्म प्रबंधन और रोग नियंत्रण के जरिए उत्पादकता, गुणवत्ता और दक्षता सुधारने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि पीएमएमएसवाई के तहत राज्य में ₹102.23 करोड़ के केंद्रीय हिस्से और ₹66.48 करोड़ के राज्य हिस्से की मत्स्य पालन संबंधी गतिविधियां जुटाई गई हैं।

बैठक में बायोफ्लॉक, केज कल्चर और सॉफ्ट-शेल क्रैब फार्मिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। बांकुड़ा और पुरुलिया में जलाशय मत्स्य पालन विकसित करने, राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल मंच पर मछुआरों का पंजीकरण बढ़ाने, कोल्ड-चेन, मूल्य संवर्धन और बाजार संपर्क मजबूत करने पर जोर दिया गया।

बैठक में मत्स्य पालन विभाग की संयुक्त सचिव (समुद्री) डॉ. सुरभि राय ने विभाग की योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने सजावटी मत्स्य पालन और उच्च मूल्य वाली प्रजातियों में राज्य की क्षमता के साथ पता लगाने की क्षमता, गहरे समुद्र में मछली पकड़ने, सुंदरबन में केकड़ा पालन, फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे, एफएफपीओ और सहकारी समितियों के गठन, प्रशिक्षण, प्रमाणित बीज और संगरोध सुविधाओं पर जोर दिया।

इसके अलावा सीएए, आईसीएआर-सीआईएफए, आईसीएआर-सीआईबीए, आईसीएआर-सीएमएफआरआई, आईसीएआर-सीआईएफआरआई, केंद्रीय शीतजल मत्स्य अनुसंधान संस्थान और आईसीएआर-एनबीएफजीआर के प्रतिनिधियों ने भी पश्चिम बंगाल में मत्स्य पालन के विकास से जुड़ी संभावनाओं और पहलों की जानकारी दी।

समीक्षा बैठक में पश्चिम बंगाल में मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र के विकास में तेजी लाने, उत्पादकता बढ़ाने, बुनियादी ढांचे के विकास, तकनीक अपनाने, क्षमता निर्माण और मछुआरों की आजीविका मजबूत करने के लिए केंद्र, राज्य सरकार और संबंधित संस्थानों के बीच सहयोग पर जोर दिया गया।

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