सरसों की दमदार किस्म! प्रति हेक्टेयर 36 क्विंटल तक पैदावार, जानिए इसकी पूरी खासियत—जानें पूरा मामला – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: अगर आप इस रबी सीजन सरसों की खेती करके तगड़ी आमदनी कमाना चाहते हैं, तो चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) हिसार द्वारा विकसित ‘आरएच 725’ सरसों की किस्म आपके लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है. किसान अगर 25 सितंबर से लेकर 20 अक्टूबर के बीच सरसों की बुवाई करना शुरु करते हैं, तो इस किस्म से कम लागत और न्यूनतम सिंचाई में रिकॉर्डतोड़ उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.

‘आरएच 725’ सरसों की किस्म से कितना मिलेगा उत्पादन?

अगर आप इस रबी सीजन ‘आरएच 725’ सरसों की किस्म की पैदावार करते हैं, तो अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं. यानी की फसल के उत्पादन ‘आरएच 725’ ने पारंपरिक और रिसर्च वैरायटियों के पुराने सभी मानकों को पीछे छोड़ दिया है. ऐसे में किसान इस किस्म से सामान्य परिस्थितियों में 25 से 26 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की औसत उपज आसानी से प्राप्त कर सकते हैं.

अगर किसान वैज्ञानिक विधि और सही समय पर देखरेख से इस किस्म की पैदावार करते हैं, तो इससे वह 36 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक भी उत्पादन भी प्राप्त कर सकते हैं.

‘आरएच 725’ सरसों की किस्म की पहचान कैसे करें?

अगर आप सरसों की इस किस्म की खेती कर रहे हैं, तो इस किस्म की पहचान की जानकारी आपको होना बेहद ही आवश्यक है. वैज्ञानिकों के अनुसार, ‘आरएच 725’ सरसों की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसकी शारीरिक संरचना से इस प्रकार की जा सकती है-

इस किस्म के पौधों में आने वाली फलियां (siliqua) काफी लंबी और मोटी होती हैं.

सामान्य किस्मों के मुकाबले इसके प्रति फली में 17 से 20 दाने तक पाए जाते हैं.

इसके दाने काफी ज्यादा वजनी और मोटे (Bold Seeds) होते हैं, जिसके कारण प्रति क्विंटल अनाज का वजन अधिक बैठता है और सीधे तौर पर किसानों का मुनाफा बढ़ जाता है.

इसके साथ ही, इस किस्म के पौधों का तना काफी मजबूत होता है, जिससे तेज हवाएं चलने या दाने भरने की स्थिति में भी फसल आसानी से जमीन पर नहीं गिरती.

किसानों को सरसों की फसल का सही मूल्य तभी मिलता है जब उसमें तेल की मात्रा अच्छी हो. व्यापारियों और मिल मालिकों द्वारा अधिक तेल प्रतिशत वाली सरसों को प्राथमिकता दी जाती है. ऐसे में किसानों के लिए

‘आरएच 725’ इस मोर्चे पर भी खरी उतरी है. इसमें तेल की मात्रा लगभग 40 से 42 प्रतिशत तक पाई जाती है. कुल मिलाकर अगर किसान इस रबी सीजन अगर इस किस्म की पैदावार करते हैं, तो किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) या उससे भी बेहतर भाव प्राप्त हो सकता है.

अगर किसान भाई इस रबी सीजन ‘आरएच 725’ किस्म की खेती करते हैं, तो वह इस किस्म से कम पानी में अधिक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं. यानी की यह किस्म समय पर बुवाई और वर्षा-आधारित (बारानी) दोनों परिस्थितियों के लिए बेहद उपयुक्त है, वहीं आरएच 725 को पूरे फसल चक्र में केवल 1 से 2 सिंचाई की ही आवश्यकता होती है. कम पानी वाले और शुष्क इलाकों जैसे दक्षिणी हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, जम्मू और उत्तरी राजस्थान के किसानों के लिए यह किसान वरदान साबित हो सकती है.

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