एग्रीवेट: राजस्थान में इस साल मूंग की नई फसल की आवक तेजी से बढ़ी है. राज्य में 1 सितंबर से अब तक करीब 63,000 टन मूंग मंडियों में पहुंच चुकी है. यह पिछले साल इसी अवधि की तुलना में करीब 10 गुना ज्यादा है. हालांकि, ज्यादा आवक के बावजूद किसानों को मूंग का बेहतर भाव नहीं मिल रहा है. किसानों को औसतन 7,452 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है, जबकि मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 8,780 रुपये प्रति क्विंटल है. यानी किसानों को MSP से करीब 15 फीसदी कम कीमत मिल रही है.
मूंग के दाम को लेकर किसानों की चिंता इसलिए भी बढ़ी है, क्योंकि सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए मूंग के MSP में सिर्फ 0.1 फीसदी की बढ़ोतरी की है. खरीफ की दूसरी फसलों के मुकाबले यह सबसे कम बढ़ोतरी है. अब किसान संगठन और दूसरे नेता किसानों को बेहतर भाव दिलाने के लिए सरसों की तरह मूंग को लेकर जागरूकता अभियान चलाने पर विचार कर रहे हैं. इसका मकसद किसानों को बाजार, मांग और बेहतर भाव की जानकारी देना है. अगर किसानों को आने वाले समय में मूंग का उचित भाव नहीं मिला, तो अगले सीजन में मूंग का रकबा घटने की संभावना भी जताई जा रही है.
राजस्थान की मंडियों में मूंग के भाव में सितंबर की शुरुआत के मुकाबले सुधार हुआ है. एगमार्कनेट के आंकड़ों के मुताबिक, महीने की शुरुआत में मूंग का औसत भाव करीब 7,000 रुपये प्रति क्विंटल था. अब यह बढ़कर 17 सितंबर को 7,960 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया. हालांकि, यह भाव अभी भी सरकार के तय 8,780 रुपये प्रति क्विंटल के MSP से नीचे है. यानी किसानों को मंडियों में अपनी उपज बेचने पर अभी भी MSP से कम कीमत मिल रही है.
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले दो सीजन की तुलना में इस बार मूंग की आवक काफी ज्यादा होने के बावजूद भाव बहुत खराब नहीं हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 से 18 सितंबर 2026 के बीच 6,451 टन मूंग की आवक दर्ज हुई. जबकि इसी अवधि में 2025 में 6,451 टन और 2024 में 7,574 टन मूंग मंडियों में पहुंची थी.
किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि इस साल मूंग के MSP में सिर्फ 12 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने कहा कि यह चिंता की बात है कि सरकार किसानों को उनकी फसल MSP पर बेचने की व्यवस्था भी सुनिश्चित नहीं कर पा रही है. जाट ने सरकारी खरीद व्यवस्था पर भी सवाल उठाया. उनका कहना है कि गेहूं और धान की तरह मूंग की खरीद भी स्वचालित तरीके से होनी चाहिए. इसके लिए राज्य सरकार के अनुरोध का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए.
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर मूंग की फसल जल्दी तैयार हो जाती है, तो क्या किसान सरकार की खरीद शुरू होने का इंतजार करते रहें? उन्होंने केंद्र सरकार से मूंग खरीद के नियमों में बदलाव करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि सरकार को राज्य की मांग का इंतजार किए बिना NAFED और NCCF के जरिए मूंग की खरीद शुरू करनी चाहिए. दूसरा विकल्प यह हो सकता है कि राज्यों को खरीद की तारीख और मात्रा तय करने की स्वतंत्रता दी जाए.
राजस्थान सरकार ने 2026 के खरीफ सीजन में मूंग का रकबा 26.50 लाख हेक्टेयर रखने का लक्ष्य तय किया था. 2025 में राज्य में मूंग की बुवाई 26.57 लाख हेक्टेयर में हुई थी. हालांकि, इस साल मूंग की बुवाई लक्ष्य से करीब 13 फीसदी कम रही. राज्य में कुल 23.17 लाख हेक्टेयर में मूंग बोई गई. ऐसे राजस्थान देश में मूंग का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है. 2025 के खरीफ सीजन में राजस्थान में 13.89 लाख टन मूंग का उत्पादन हुआ था. यह देश के कुल मूंग उत्पादन का करीब 72 फीसदी था.