एग्रीवेट: हरियाणा के सिरसा जिले में लंबे समय से बारिश की कमी और नहर के पानी की कमी से परेशान किसानों को अब बीती रात आए तेज तूफान से बड़ा नुकसान हुआ है. जिले के कई इलाकों में तेज हवाओं और बारिश ने खड़ी खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचाया है. कपास और ग्वार की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है. राजस्थान सीमा से सटे चौपटा क्षेत्र में रात करीब 1 बजे तेज हवाओं के साथ बारिश हुई. इससे कई गांवों में खेतों में खड़ी फसलें गिर गईं और खराब हो गईं. किसानों का कहना है कि कम मॉनसून बारिश और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने काफी मेहनत से फसल बचाई थी. लेकिन कुछ ही घंटों में आए तूफान ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, चौपटा क्षेत्र के जमाल, बरासरी, कुटियाना, जोड़कियां, रामपुरा ढिल्लों, कुम्हारिया, खेड़ी, कागदाना, शक्कर मंदोरी, शाहपुरिया, दरबा कलां, नाथूसरी और रूपावास समेत कई गांवों में फसलों को नुकसान की सूचना है. इस सीजन में क्षेत्र में करीब 25,000 हेक्टेयर में कपास, जिसमें बीटी कपास भी शामिल है, की बुवाई हुई है. वहीं, करीब 16,000 हेक्टेयर में ग्वार बोया गया है. किसानों के मुताबिक कपास, ग्वार, बाजरा और मूंगफली की फसलों को नुकसान पहुंचा है. इनमें ग्वार की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित बताई जा रही है.
मॉनसून सीजन में बारिश सामान्य से काफी कम
किसान नेता लखविंदर सिंह औलख ने नुकसान का जायजा लिया
इस बीच भारतीय किसान एकता (BKE) के राज्य अध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख के नेतृत्व में एक टीम ने भांगू गांव पहुंचकर फसलों को हुए नुकसान का जायजा लिया. औलख ने कहा कि किसान पहले से ही कई सालों से फसल खराब होने और आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि बारिश और नहर के पानी की कमी के साथ-साथ फसलों में बीमारी लगने से कपास, ग्वार और बाजरा को बड़े स्तर पर नुकसान हुआ है. उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमित किसानों की फसलों का तुरंत और पारदर्शी फसल कटाई सर्वे कराने की मांग की, ताकि किसानों को बीमा का पैसा जल्द मिल सके. औलख ने कहा कि जिन किसानों ने फसल का बीमा नहीं कराया है या सूखे और खराब मौसम के कारण उन्हें भारी नुकसान हुआ है, उन्हें भी प्रति एकड़ के हिसाब से पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए.