एग्रीवेट: भारत के प्रमुख एफएमसीजी ग्रुप बीएल एग्रो ने अपनी बायोटेक्नोलॉजी सहायक कंपनी लीड्स जेनेटिक्स में 1500 करोड़ रुपये के निवेश की एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि है. इस निवेश का उद्देश्य जेनेटिक्स और रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी को इंटीग्रेटेड करते हुए 360-डिग्री सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल विकसित करना है, जिससे देश में पशु प्रजनन और डेयरी उद्योग में सुधार लाया जा सके. कंपनी इस मॉडल को अन्य राज्यों में भी दोहराने के लिए उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के साथ बातचीत कर रही है. यह घोषणा दो दिवसीय कैटल जीनोमिक्स समिट 2026 के दौरान की गई. कंपनी इन राज्यों में एक इंटीग्रेटेड डेयरी और जेनेटिक्स इकोसिस्टम विकसित करने के लिए निवेश करेगी. इसमें इन-हाउस इंटीग्रेटेड ब्रीड इम्प्रूवमेंट फार्म, आईवीएफ–ईटी लेबोरेटरी, मल्टिपल ओव्यूलेशन एम्ब्रियो ट्रांसफर (एमओईटी), पैथोलॉजी लेबोरेटरी और जीनोमिक्स लेबोरेटरी शामिल होंगे. इससे नस्ल सुधार से जुड़ी पूरी वैल्यू चेन को एक ही स्थान पर इंटीग्रेटेड किया जा सकेगा. दो दिवसीय समिट में मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, उत्तर प्रदेश के पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह और उत्तर प्रदेश के वन, पर्यावरण, प्राणी उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुण कुमार सक्सेना ने भाग लिया. मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि लीड्स जेनेटिक्स और बीएल एग्रो द्वारा इतने बड़े स्तर पर किया जा रहा कार्य अत्यंत सराहनीय है. मैं इस क्षेत्र में रिसर्च और इनोवेशन को आगे बढ़ाने के लिए लीड्स जेनेटिक्स के प्रयासों की सराहना करता हूं. भारत में आधुनिक एनिमल जेनेटिक्स, ब्रीडिंग टेक्नोलॉजीज और साइंटिफिक रिसर्च को आगे बढ़ाने पर कंपनी का फोकस देश के डेयरी और लाइवस्टॉक सेक्टर को मजबूत करने की दिशा में एक प्रगतिशील कदम है. यह पहल देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने, प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और किसानों की समृद्धि को बढ़ावा देने की क्षमता रखती है. उत्तर प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि कृषि तकनीक विशेष रूप से निजी क्षेत्र के नेतृत्व में, भारत की प्रगति को देखना उत्साहजनक है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, लेकिन प्रति पशु उत्पादकता अभी भी कम है और हाई-एंड जेनेटिक्स के लिए हम अब भी आयातित जर्मप्लाज्म पर निर्भर हैं. लीड्स जेनेटिक्स देश में एलीट बुल्स, भ्रूण और सेक्स्ड सीमेन का उत्पादन कर तथा देशी नस्लों को मजबूत करते हुए आनुवंशिक आत्मनिर्भरता के निर्माण में योगदान दे रही है. दूध उत्पादन में वृद्धि से प्रति लीटर दूध उत्पादन पर मीथेन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद मिल सकती है. लीड्स जेनेटिक्स में पहले ज़ेबू-ऑप्टिमाइज़्ड बोवाइन एसएनपी चिप और इल्युमिना नोवासी़क एक्स प्लेटफॉर्म पर नेक्स्ट-जेनरेशन सीक्वेंसिंग का लाइव प्रदर्शन भी किया गया. जीनोमिक चिप लीड्स जेनेटिक्स को हजारों आनुवंशिक मार्करों के आधार पर किसी पशु के डीएनए का आकलन करने में सक्षम बनाती है. इससे जीनोमिक एस्टीमेटेड ब्रीडिंग वैल्यूज के माध्यम से अधिक सटीक चयन में मदद मिलती है. बीएल एग्रो के चेयरमैन डॉ. घनश्याम खंडेलवाल ने कहा कि किसान हमारे 360-डिग्री सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल के केंद्र में हैं. बेहतर जेनेटिक्स से दूध उत्पादन, प्रजनन क्षमता और पशुओं के दीर्घकालिक मूल्य में सुधार किया जा सकता है, साथ ही किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं. जेनेटिकली सेलेक्टेड गायों से उच्च गुणवत्ता वाले दूध का उत्पादन होने की उम्मीद है, जिसमें प्रति गाय प्रतिदिन औसतन 40–60 लीटर दूध उत्पादन का अनुमान है. इससे किसानों की आय के स्रोतों में सुधार होगा. लीड्स जेनेटिक्स के सह-संस्थापक डॉ. आशीष दुबे ने कहा कि हमें नवीनतम तकनीकों को प्रदर्शित करने का अवसर मिलने पर गर्व है. हमारा उद्देश्य एलीट पशुओं से प्राप्त उन्नत जेनेटिक्स के लाभों को किसानों और भारत की व्यापक पशुधन आबादी तक पहुंचाना है. डेयरी का भविष्य केवल बेहतर पोषण और प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि बेहतर जेनेटिक्स भी उतना ही महत्वपूर्ण है. लीड्स जेनेटिक्स के वीपी ऑपरेशंस डॉ. एस.के. अग्रवाल ने कहा कि इन जेनेटिकली सेलेक्टेड एलीट गिर बछड़ों का लाइव जन्म एक मजबूत स्वदेशी ब्रीडिंग प्रोग्राम के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. हमारा ध्यान उन्नत जेनेटिक्स को वैज्ञानिक फार्म मैनेजमेंट के साथ जोड़ने पर है, ताकि भारतीय पशुओं की उत्पादकता, प्रजनन क्षमता और प्रतिकूल परिस्थितियों में अनुकूलन क्षमता में सुधार किया जा सके. लीड्स जेनेटिक्स के हेड – आईवीएफ- एमओईटी, डॉ. सरवन्नन दुरैराज ने कहा कि हमारा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस उन्नत भ्रूण उत्पादन तकनीकों को बड़े पैमाने पर लागू करने और बेहतर जेनेटिक्स को अधिक व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है. हमारा लक्ष्य वर्ष 2027 के अंत तक प्रति माह 15,000 भ्रूणों का उत्पादन करना है. इससे भारत के डेयरी क्षेत्र में आनुवंशिक सुधार की प्रक्रिया को तेज करने के लिए आवश्यक क्षमता विकसित होगी. लीड्स जेनेटिक्स की पहल का उद्देश्य आयात लागत के एक अंश पर देश में ही एलीट बुल्स, भ्रूण और सेक्स्ड सीमेन का उत्पादन करना है. इसका उद्देश्य केवल व्यक्तिगत पशुओं की जेनेटिक्स में सुधार करना नहीं, बल्कि एक अधिक मजबूत, उत्पादक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय डेयरी क्षेत्र का निर्माण करना है.