एग्रीवेट: रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर दी जा रही सब्सिडी बंद करने को लेकर चल रही ऊहापोह के बीच गुजरात के गवर्नर आचार्य देवव्रत ने इस पर सरकार की स्थिति स्पष्ट कर दी है. उन्होंने कहा कि अचानक सब्सिडी बंद करना सही कदम नहीं होगा. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों से विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ सकता है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि किसानों को रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल वाली खेती छोड़ने पर मजबूर करने की बजाय विकल्प देने की जरूरत है. गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने लोक भवन में मीडिया से कहा कि रसायन आधारित खेती के बजाय प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को कृषि और बागवानी सब्सिडी का एक बड़ा हिस्सा दिया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक किसान इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रोत्साहित हों. राज्यपाल ने कहा कि किसानों को रासायनिक खेती छोड़ने के लिए मजबूर करने के बजाय फायदे दिखाकर प्राकृतिक खेती की ओर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. राज्यपाल ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर दी जाने वाली सब्सिडी को अचानक बंद नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसा कदम उठाने पर किसान विरोध-प्रदर्शन शुरू कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि सरकारी कृषि सब्सिडी का एक बड़ा हिस्सा रासायनिक खेती के बजाय प्राकृतिक खेती करने वालों को दिया जाना चाहिए, ताकि किसान इस खेती पद्धति की ओर आकर्षित हों. किसानों को प्रमाणों के साथ आश्वस्त किया जाना चाहिए कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन कम नहीं होता, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, पानी और पैसे की बचत होती है. गुजरात राज्यपाल ने कहा कि गुजरात सरकार प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को पहले से ही वित्तीय सहायता दे रही है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्राकृतिक खेती में इस्तेमाल होने वाली गायों के रखरखाव के लिए किसानों को सालाना 12,000 रुपये देती है, इसके अलावा विभिन्न उपकरणों के लिए भी वित्तीय सहायता दी जाती है. गायों के गोबर आदि का इस्तेमाल जैविक खाद के रूप खेतों में किया जाता है.