एग्रीवेट: November Weather Update: अक्टूबर में कम बारिश के चलते कई राज्यों के किसान परेशान रहे. खासकर मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ इलाकों में बारिश की भारी कमी देखने को मिली. इसका असर रबी फसलों की बुवाई और खेतों की तैयारी पर पड़ने की चिंता बढ़ गई थी. अब नवंबर का मौसम किसानों के लिए कुछ राहत लेकर आ सकता है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस महीने मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश होने का अनुमान जताया है.
नवंबर में होने वाली बारिश गेहूं की बुवाई के लिहाज से काफी अहम है. जिन इलाकों में खेतों में नमी की कमी है, वहां बारिश से बुवाई की तैयारी और फसलों की शुरुआती बढ़वार में मदद मिल सकती है. हालांकि, देश के ज्यादातर हिस्सों में इस महीने भी सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है.
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मौसम विभाग के मुताबिक, नवंबर में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के आसपास के कुछ इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है. पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में भी अच्छी बारिश होने की संभावना है. इससे इन राज्यों के किसानों को रबी फसलों की बुवाई में मदद मिल सकती है.
वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है. हालांकि, इन राज्यों में गेहूं की खेती काफी हद तक सिंचाई के साधनों पर निर्भर करती है, इसलिए कम बारिश का असर सीमित रहने की उम्मीद है. इसके उलट राजस्थान और गुजरात के बड़े हिस्सों में भी बारिश कम हो सकती है. जिन इलाकों में सिंचाई की अच्छी सुविधा नहीं है, वहां खेतों में नमी की कमी से बुवाई और फसल की शुरुआती बढ़वार पर असर पड़ सकता है.
अक्टूबर में देश के कई हिस्सों में बारिश सामान्य से काफी कम हुई. पूर्वी राजस्थान में 25 फीसदी, जबकि पश्चिमी राजस्थान में 63 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई. मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश की कमी 71 फीसदी और पश्चिमी हिस्से में 82 फीसदी रही. गुजरात क्षेत्र में 99 फीसदी, सौराष्ट्र-कच्छ में 87 फीसदी और मध्य महाराष्ट्र में 95 फीसदी कम बारिश हुई.
हालांकि, अक्टूबर के आखिरी दिनों में पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में बारिश होने से हालात कुछ सुधरे. पूर्वी यूपी में 28 अक्टूबर तक बारिश की कमी 57 फीसदी थी, जो महीने के अंत तक घटकर 4 फीसदी रह गई. बिहार में भी बारिश की कमी 55 फीसदी से घटकर 4 फीसदी पर आ गई.
नवंबर में दक्षिण भारत के बड़े हिस्से में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है. इसमें तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, केरल और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक जैसे इलाके शामिल हैं. मौसम विभाग के मुताबिक, इस पूरे क्षेत्र में बारिश लंबी अवधि के औसत 118.7 मिमी के 77 फीसदी से भी कम रह सकती है. देशभर की बात करें तो नवंबर में कुल बारिश लंबी अवधि के औसत 29.7 मिमी के 77 फीसदी से भी कम रहने का अनुमान है. यानी कुछ इलाकों में अच्छी बारिश के आसार हैं, लेकिन ज्यादातर जगहों पर बारिश की कमी रह सकती है.
IMD के अनुसाप प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो का असर दिसंबर तक बना रह सकता है. हालांकि, जनवरी से मार्च के बीच इसकी ताकत धीरे-धीरे कम होने की संभावना है. वहीं, अक्टूबर में देश का औसत अधिकतम तापमान 32.43 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 1901 के बाद इस महीने का सबसे ज्यादा तापमान है. नवंबर में भी ज्यादातर इलाकों में दिन और रात का तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है.
फसल वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने कुल 17.772 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है. इसमें 12.1 करोड़ टन गेहूं, 1.233 करोड़ टन चना, 21 लाख टन मसूर, 1.43 करोड़ टन सरसों और 24.2 लाख टन जौ उत्पादन का लक्ष्य शामिल है. ऐसे में नवंबर में होने वाली बारिश रबी फसलों की बुवाई के लिए काफी अहम मानी जा रही है.