एग्रीवेट: देश का मछली उत्पादन 50 फीसदी बढ़ाने के टारगेट पर सरकार ने काम तेज कर दिया है. यह उत्पादन लक्ष्य अगले 5 साल में हासिल किया जाना है और इसके लिए मछुआरों, मछली पालकों के लिए कई सब्सिडी और डीबीटी योजनाएं लाने की तैयारी है. केंद्रीय मत्स्य पालन सचिव ने शुक्रवार को भोपाल में राष्ट्रीय कार्ययोजना के विकास चरण की औपचारिक शुरुआत करते हुए यह बातें सामने रखीं. बता दें कि वर्तमान में देश का मछली उत्पादन सालाना लगभग 2 करोड़ टन है.
चीन सालाना 6 करोड़ टन से भी ज्यादा मछली उत्पादन के साथ दुनिया में नंबर वन है. वहीं, भारत लगभग 2 करोड़ मछली उत्पादन के साथ दूसरे स्थान पर है. फिश प्रोडक्शन में नंबर वन बनने और निर्यात संभावनाएं बढ़ाने के लिए भारत ने अगले पांच वर्षों में मछली उत्पादन बढ़ाकर 3 करोड़ टन करने का लक्ष्य रखा है. इसके साथ ही समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात 1.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का टारगेट रखा है. इसके लिए अंतर्देशीय लघुस्तरीय मत्स्य पालन पर एक राष्ट्रीय कार्ययोजना तैयार की जा रही है.
केंद्रीय मत्स्य पालन सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने शुक्रवार को भोपाल में कहा कि मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है. उन्होंने उत्पादन बढ़ाने के विकास चरण की औपचारिक शुरुआत करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य मछुआरों की आजीविका में सुधार, मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना और मीठे पानी के संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देना है. क्योंकि, कार्ययोजना का अहम हिस्सा मछली पालकों और सब्सिडी और अन्य योजनाओं के जरिए प्रोत्साहित करना है.
केंद्रीय मत्स्य पालन सचिव ने कहा कि भारत में सालाना मछली उत्पादन बढ़कर 1.97 करोड़ टन हो गया है. इसमें अंतर्देशीय मत्स्य पालन का योगदान लगभग तीन-चौथाई है, जबकि समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात 70,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है. आधिकारिक बयान के मुताबिक मत्स्य पालन सचिव ने कहा कि उत्पादन और निर्यात बढ़ाने के साथ छोटे स्तर पर मत्स्य पालन करने वाले मछुआरों की आजीविका सुरक्षित रखना भी जरूरी है.
मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रस्तावित कार्ययोजना मछुआरा समुदायों तक पहुंचाने पर जोर है ताकि उनकी आजीविका में व्यावहारिक सुधार हो तो वह इस क्षेत्र में और आकर्षित होंगे. हालांकि, जलवायु परिवर्तन और पानी की गुणवत्ता में गिरावट को अंतर्देशीय मत्स्य पालन के सामने प्रमुख चुनौतियां भी हैं. उन्होंने कहा कि जलाशयों में ऑक्सीजन का स्तर कम होना भी चिंता का विषय है. कार्ययोजना में इन चुनौतियों से निपटने और मत्स्य पालन को टिकाऊ बनाने के उपाय शामिल किए जाने चाहिए.