एग्रीवेट: Uttar Pradesh mal Insurance Scheme: उत्तर प्रदेश में पशुपालकों को पशुओं की मृत्यु, दुर्घटना और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना शुरू की गई है. इस योजना का उद्देश्य पशुपालकों को वित्तीय सुरक्षा देना और प्रदेश में डेयरी उद्योग को बढ़ावा देना है. उत्तर प्रदेश पशुधन विकास बोर्ड के सीईओ डॉ. प्रमोद कुमार सिंह ने बाताया कि योजना के तहत 10 लाख पशुओं का बीमा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसमें बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार वहन करेगी, जबकि पशुपालकों को केवल 15 प्रतिशत राशि देनी होगी. योजना की प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है, जिससे पशुपालक घर बैठे बीमा कराने और प्रीमियम जमा करने की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे.
उत्तर प्रदेश सरकार की इस योजना के तहत गाय, भैंस, बकरी, भेड़, सूअर, घोड़े, ऊंट समेत अन्य पालतू पशुओं को बीमा सुरक्षा देने का लक्ष्य है. पशुओं की मृत्यु महामारी, प्राकृतिक आपदा या किसी आकस्मिक दुर्घटना के कारण होने पर पशुपालकों को आर्थिक सहायता मिल सकेगी. इससे पशुपालन के दौरान होने वाले जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी. अक्सर पशुपालक अपनी बचत का बड़ा हिस्सा पशु खरीदने और उनके पालन-पोषण पर खर्च करते हैं. ऐसे में किसी पशु की अचानक मृत्यु होने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. बीमा योजना के जरिए इस नुकसान की भरपाई करने और पशुपालकों को दोबारा अपना काम शुरू करने में मदद देने का प्रयास किया जा रहा है.
मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना की सबसे अहम बात यह है कि इसमें बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार वहन करेगी. इसमें 50 प्रतिशत अनुदान राज्य सरकार की ओर से और 35 प्रतिशत अतिरिक्त सरकारी सहायता का प्रावधान बताया गया है. वहीं, पशुपालक को प्रीमियम का केवल 15 प्रतिशत हिस्सा देना होगा. योजना के लिए उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. इससे पशुपालकों पर बीमा कराने का आर्थिक बोझ कम होगा और अधिक से अधिक लोग अपने पशुओं का बीमा कराने के लिए प्रोत्साहित हो सकेंगे. हालांकि, पशुओं की श्रेणी, बीमित राशि और पात्रता से जुड़ी शर्तों की जानकारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों से करनी चाहिए.
योजना की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था अपनाई गई है. पशुपालकों को आवेदन के दौरान पशु का आधार टैग और उसकी तस्वीर अपलोड करनी होगी. इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बीमा प्रीमियम का भुगतान UPI या QR कोड के माध्यम से किया जा सकेगा. आवेदन के लिए पशुपालक के आधार कार्ड, उत्तर प्रदेश के निवास प्रमाण पत्र, पहचान पत्र और आधार से जुड़े बैंक खाते का विवरण जरूरी दस्तावेजों में शामिल हैं. ऑनलाइन प्रक्रिया से आवेदन और भुगतान में सुविधा मिलने की उम्मीद है. इससे पशुपालकों को बीमा कराने के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत भी कम हो सकती है.
योजना के तहत बीमित पशु की मृत्यु होने पर पशुपालक को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार 24 घंटे के भीतर संबंधित एजेंसी या बीमा कंपनी को सूचना देनी होगी. इसके बाद जरूरी दस्तावेजों और दावे की जांच की जाएगी. दावा स्वीकृत होने पर एक महीने के भीतर बीमा राशि सीधे पशुपालक के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाने का प्रावधान बताया गया है. वहीं, यदि किसी दुर्घटना के कारण बीमित पशु स्थायी रूप से विकलांग हो जाता है, तो निर्धारित शर्तों के तहत बीमित राशि का 75 प्रतिशत तक भुगतान किया जा सकता है. उत्तर प्रदेश पशुधन विकास बोर्ड (UPLDB) के सीईओ प्रमोद कुमार सिंह के मुताबिक, पशुधन बीमा पशुपालकों को आर्थिक जोखिम से सुरक्षा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. हालांकि, क्लेम की राशि और भुगतान बीमा पॉलिसी की शर्तों तथा दावे की स्वीकृति पर निर्भर करेगा.