एग्रीवेट: पाकिस्तान में बढ़ती कृषि लागत, फसलों के कम दाम और नीति-निर्माण में देरी को लेकर किसानों की चिंता गहरा गई है. किसान संगठन पाकिस्तान किसान इत्तेहाद ने सरकार से देश में कृषि आपातकाल घोषित करने की मांग की है. संगठन का कहना है कि किसानों को लगातार आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है, जिससे कृषि क्षेत्र गंभीर संकट की ओर बढ़ रहा है. ARY News के हवाले से ” ने रिपोर्ट दी.
पाकिस्तान किसान इत्तेहाद के अध्यक्ष खालिद महमूद खोखर ने मुल्तान में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि एक फसल सीजन में हुआ नुकसान अगले तीन सीजन तक किसानों को प्रभावित करता है. उनका आरोप है कि समय पर सरकारी हस्तक्षेप और स्थिर कृषि नीतियों की कमी के कारण पाकिस्तान का कृषि क्षेत्र पिछड़ता जा रहा है.
खोखर ने मांग की कि किसानों को उनकी उत्पादन लागत पर कम से कम 25 प्रतिशत लाभ सुनिश्चित किया जाए. उनका कहना है कि मौजूदा समय में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है. उन्होंने यह भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार कृषि उत्पादों के लाभकारी मूल्य सुनिश्चित न कर पाने के पीछे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की शर्तों का हवाला दे रही है.
उन्होंने गेहूं उत्पादन और उपलब्धता को लेकर भी चिंता जताई. उनके अनुसार आम लोगों को गेहूं प्राप्त करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि किसानों को इसकी खेती बढ़ाने के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिल रहा. खोखर का कहना है कि यदि किसानों को उचित मूल्य मिले तो वे अधिक गेहूं उत्पादन के लिए तैयार होंगे. उन्होंने बताया कि सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 4,500 पाकिस्तानी रुपये प्रति मन निर्धारित किया है.
गन्ना किसानों की स्थिति पर भी संगठन ने चिंता व्यक्त की. खोखर ने कहा कि इस वर्ष गन्ना उत्पादन में लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि होने के बावजूद किसानों को उनकी उपज का संतोषजनक मूल्य नहीं मिल रहा है. इससे किसानों के सामने निवेश की भरपाई और लाभ अर्जित करने की चुनौती खड़ी हो गई है.
किसान संगठन का कहना है कि पाकिस्तान का कृषि क्षेत्र बढ़ती उत्पादन लागत, फसलों के कम दाम और मूल्य निर्धारण से जुड़ी अनिश्चितताओं से जूझ रहा है. कृषि देश की अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण रोजगार का महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में किसानों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है.