सीधी : डॉ विपिन ने उद्यानिकी फसलों की उन्नत खेती को बनाया आय का स्रोत – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 08 अक्टूबर 2026, सीधी: सीधी : डॉ विपिन ने उद्यानिकी फसलों की उन्नत खेती को बनाया आय का स्रोत – कृषि में उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद नौकरी या कॉर्पोरेट क्षेत्र को प्राथमिकता देने के बजाय खेती को अपना कैरियर और आय का प्रमुख स्रोत बनाना आसान निर्णय नहीं था। लेकिन दृढ़ संकल्प, आधुनिक तकनीक और विभागीय योजनाओं के सहयोग से ग्राम मनकीसर, विकासखंड रामपुर नैकिन निवासी डॉ. विपिन शुक्ला ने खेती को लाभ का व्यवसाय बनाकर एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।

डॉ. विपिन शुक्ला ने कृषि विषय में एमएससी तथा डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने के बाद पारंपरिक खेती के बजाय उद्यानिकी फसलों की उन्नत एवं संरक्षित खेती को अपनाया। खेती की शुरुआत सब्जी, फल और फूलों की फसलों से की और धीरे-धीरे इसे मिश्रित खेती का स्वरूप दिया। इससे उन्हें विभिन्न फसलों से अलग-अलग समय पर आय प्राप्त होने लगी और किसी एक फसल में नुकसान होने पर उसका प्रभाव कम करने में मदद मिली।

विभागीय योजनाओं ने आसान की आधुनिक खेती की राह – डॉ. शुक्ला बताते हैं कि आधुनिक खेती की शुरुआत में कई चुनौतियां सामने आईं। उद्यानिकी विभाग, कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केन्द्र से मिले मार्गदर्शन ने इन चुनौतियों को अवसर में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने उद्यानिकी विभाग की योजनाओं के माध्यम से ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, शेडनेट हाउस तथा कृषि यंत्रीकरण जैसी सुविधाओं का लाभ लिया। इन योजनाओं में पात्रता अनुसार लगभग 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलने से आधुनिक खेती में निवेश करना आसान हुआ।शेडनेट हाउस के माध्यम से संरक्षित खेती अपनाने से फसलों की उत्पादकता और गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। डॉ. शुक्ला के अनुसार संरक्षित खेती में सामान्य परिस्थितियों की तुलना में उत्पादन लगभग दोगुना तक प्राप्त हो जाता है।

एक एकड़ से 10 से 15 लाख रुपये तक की आय – डॉ. शुक्ला वर्तमान में शेडनेट हाउस सहित मिश्रित खेती में शिमला मिर्च, टमाटर, खीरा, गेंदा, गोभी सहित विभिन्न उद्यानिकी फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। उनके अनुसार इन फसलों की खेती में लगभग 2 से 5 लाख रुपये प्रति एकड़ तक लागत आती है, जबकि बेहतर उत्पादन और बाजार प्रबंधन के आधार पर 10 से 15 लाख रुपये प्रति एकड़ तक कुल आय प्राप्त हो जाती है। आधुनिक तकनीकों और उद्यानिकी विभाग की योजनाओं का लाभ लेने से उनकी कृषि आय में पहले की तुलना में लगभग चार गुना तक वृद्धि हुई है।

डॉ. शुक्ला का कहना है कि खेती को केवल परंपरागत कार्य मानने के बजाय यदि इसे वैज्ञानिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन और बाजार की मांग के अनुरूप व्यवसाय के रूप में किया जाए तो यह युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन सकती है। डॉ. विपिन शुक्ला अन्य किसानों से अपील करते हुए कहते हैं कि किसान उद्यानिकी विभाग और कृषि विभाग की योजनाओं की जानकारी लेकर आधुनिक तकनीकों को अपनाएं। ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, संरक्षित खेती और यंत्रीकरण जैसी सुविधाएं खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ उत्पादन और आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

डॉ शुक्ला ने  खेती को आगे बढ़ाने में सहयोग और मार्गदर्शन देने के लिए उद्यानिकी विभाग, कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र तथा विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।  डॉ. शुक्ला की सफलता यह संदेश देती है कि उच्च शिक्षा प्राप्त युवा यदि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सोच के साथ कृषि को अपना करियर बनाएं तो खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि सम्मानजनक और लाभकारी व्यवसाय भी बन सकती है। उनका विश्वास है कि किसानों को योजनाओं, तकनीक और बाजार से जोड़ने का यह क्रम निरंतर जारी रहा तो मध्य प्रदेश का किसान आने वाले समय में और अधिक सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनेगा।

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